उत्तराखंड में दुष्कर्म के मामले: पिछले एक साल में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं, NCRB और राज्य डेटा से साफ
उत्तराखंड में दुष्कर्म के मामले: पिछले एक साल में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं, NCRB और राज्य डेटा से साफ
देहरादून: उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर चिंता का माहौल बना रहता है, लेकिन पिछले एक साल (नवंबर 2024 से नवंबर 2025 तक) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुष्कर्म (रेप) के मामलों में कोई उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज नहीं हुई है। बल्कि, राज्य पुलिस और NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के डेटा से पता चलता है कि 2024 में दुष्कर्म के केसों में कमी आई है। हालांकि, 2023 के आंकड़ों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 26% की वृद्धि हुई थी, जो चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्टिंग में सुधार के कारण आंकड़े बढ़े लगते हैं, लेकिन वास्तविक घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
प्रमुख आंकड़े (NCRB और राज्य पुलिस डेटा के आधार पर):
2022: 872 दुष्कर्म के मामले दर्ज। यह हिमालयी राज्यों (हिमाचल, अरुणाचल आदि) में सबसे अधिक था।
2023: महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 26% वृद्धि (कुल 3,836 मामले, जिसमें दुष्कर्म प्रमुख)। राज्य 6वें स्थान पर था प्रतिशत वृद्धि के मामले में। 867 दुष्कर्म केसों में 99.9% आरोपी परिचित (परिवार, दोस्त, पड़ोसी)।
2024: दुष्कर्म, डकैती और लूट जैसे गंभीर अपराधों में महत्वपूर्ण कमी। कुल अपहरण केस 77 (2023) से बढ़कर 164 हो गए, लेकिन दुष्कर्म में गिरावट। जनवरी 2024 में 23 मामले दर्ज (2020 के मुकाबले दोगुना)।
2025 (जनवरी तक): FTSC (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) डेटा में रेप और POCSO मामलों की जानकारी उपलब्ध, लेकिन कुल वृद्धि का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं। राज्य में प्रति 10 घंटे एक दुष्कर्म की घटना का अनुमान (2023 सर्वे)।
पिछले साल की तुलना में 2024 में दुष्कर्म के मामलों में कमी का श्रेय राज्य सरकार के अभियान को दिया जा रहा है, जैसे ‘मिशन शक्ति’ और फास्ट ट्रैक कोर्ट। लेकिन अपहरण और हत्या जैसे अपराध बढ़े हैं (हत्या: 189 से 218)। NCRB 2024 रिपोर्ट (अक्टूबर 2025 में जारी) के अनुसार, उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक।
कारण और चुनौतियां:
बढ़ती रिपोर्टिंग: जागरूकता से मामले दर्ज हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी 70% मामले दब जाते हैं।
परिचित आरोपी: 99% केस परिवार या जान-पहचान वालों से जुड़े।
राजनीतिक बहस: विपक्ष (कांग्रेस) सरकार पर निशाना साधता है, जबकि BJP रिपोर्टिंग सुधार का दावा करती है।
सरकार के कदम:
2025 में 50 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट।
‘वन स्टॉप सेंटर’ और हेल्पलाइन 181 को मजबूत।
स्कूलों में जागरूकता कैंपेन।
विशेषज्ञों का कहना है कि कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक बदलाव जरूरी। अगर आप पीड़ित हैं, तो 1098 या 181 पर संपर्क करें। पूर्ण NCRB 2025 रिपोर्ट दिसंबर में आएगी।
