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तेहरान में पानी का संकट गहराया: राशनिंग की शुरुआत, राष्ट्रपति ने शहर खाली करने की चेतावनी दी

तेहरान में पानी का संकट गहराया: राशनिंग की शुरुआत, राष्ट्रपति ने शहर खाली करने की चेतावनी दी

ईरान की राजधानी तेहरान में जल संकट ने चरम सीमा पार कर ली है। लगातार छठे साल सूखे की मार झेल रही इस मेगासिटी के पांच प्रमुख बांधों में जल स्तर अब मात्र 11 प्रतिशत रह गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि नवंबर के अंत तक बारिश नहीं हुई, तो पानी की राशनिंग शुरू करनी पड़ेगी। उन्होंने आगे कहा, “अगर बारिश नहीं हुई, तो हमारे पास कोई पानी नहीं बचेगा और शहर खाली करना पड़ेगा।” यह बयान तेहरान के करीब 91 लाख निवासियों के लिए एक बड़ा झटका है, जहां पहले से ही बिजली कटौती और गर्मी की लहर ने जीवन को कठिन बना दिया है।

तेहरान क्षेत्रीय जल कंपनी के अनुसार, लात्यान बांध सहित प्रमुख जलाशयों का जल स्तर 60 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। कुछ बांधों में क्षमता मात्र नौ प्रतिशत बची है। जल उद्योग महासंघ के महासचिव अली शरियात ने इसे “प्रबंधन की विफलता” करार देते हुए कहा कि राशनिंग पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी। वर्तमान में शहर का 62 प्रतिशत पानी भूमिगत स्रोतों से आता है, जिनका जल स्तर तेजी से गिर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, कृषि और उद्योग में अत्यधिक उपयोग तथा वैज्ञानिक चेतावनियों की अनदेखी ने इस संकट को जन्म दिया है।

सरकार ने तत्काल कदम उठाने का ऐलान किया है। शहर में निर्धारित घंटों के लिए पानी और बिजली की आपूर्ति काटने की योजना है। जल एवं जलविद्युत कंपनी के प्रमुख मोहसेन अर्दकानी ने अपील की कि यदि नागरिक दैनिक 130 लीटर से अधिक पानी का उपयोग कम कर 10 प्रतिशत बचत करें, तो पूर्ण संकट टाला जा सकता है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यह पिछले 50 वर्षों का सबसे शुष्क काल है, जिसमें वर्षा 40 प्रतिशत कम रही है। पड़ोसी इराक में भी इसी तरह का संकट है, जहां टाइग्रिस और यूफ्रेट्स नदियां सूख रही हैं।

यह संकट केवल तेहरान तक सीमित नहीं। मशहद और इस्फहान जैसे शहरों में भी आपातकालीन कुएं सूख चुके हैं, जिससे क्षेत्रीय राशनिंग की योजना बनी हुई है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने संरक्षण और संसाधन प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि बिना सामूहिक सहयोग के आपदा अपरिहार्य है। मौसम विभाग ने नवंबर में कोई महत्वपूर्ण वर्षा न होने की भविष्यवाणी की है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। ईरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील भी की है, लेकिन आर्थिक प्रतिबंधों के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण हैं। विशेषज्ञ चेताते हैं कि यदि तत्काल उपाय न किए गए, तो यह पर्यावरणीय आपदा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

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