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गेहूं का आटा क्यों हो सकता है स्वास्थ्य के लिए हानिकारक? वैज्ञानिक तथ्यों से जानें सच्चाई और विकल्प

गेहूं का आटा क्यों हो सकता है स्वास्थ्य के लिए हानिकारक? वैज्ञानिक तथ्यों से जानें सच्चाई और विकल्प

भारतीय थाली का अभिन्न अंग गेहूं का आटा आज स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। पिछले कुछ सालों में मैदा और रिफाइंड गेहूं के अत्यधिक सेवन से डायबिटीज, मोटापा, पाचन रोग और ग्लूटेन संवेदनशीलता के मामले 40% तक बढ़े हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, शहरी भारत में 68% लोग रोजाना 300 ग्राम से अधिक रिफाइंड आटा खा रहे हैं, जो WHO की सिफारिश (150-200 ग्राम) से दोगुना है। लेकिन क्या वाकई गेहूं का आटा ‘जहर’ है? आइए विज्ञान और विशेषज्ञों की राय से समझते हैं कि कब और क्यों यह हानिकारक हो जाता है – और क्या हैं सुरक्षित विकल्प।

1. रिफाइंड आटा: पोषण का खाली खोल

सामान्य बाजार का गेहूं का आटा (मैदा/चक्की आटा) 70-80% रिफाइंड होता है। इसमें चोकर (bran) और बीजाणु (germ) हटा दिए जाते हैं, जो फाइबर, विटामिन B, E, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स का स्रोत होते हैं।

नुकसान:

ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 85+ – रोटी खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, इंसुलिन रेसिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा।

फाइबर की कमी → कब्ज, IBS, कोलन कैंसर का जोखिम।

पोषण शून्य → आयरन, जिंक की कमी से एनीमिया, कमजोरी।

तथ्य: एक अध्ययन (The Lancet, 2024) में पाया गया कि रिफाइंड आटा खाने वालों में हृदय रोग का खतरा 32% अधिक होता है।

2. ग्लूटेन: सबके लिए नहीं है दोस्त

गेहूं में ग्लूटेन प्रोटीन होता है, जो रोटी को फूलने में मदद करता है। लेकिन:

सीलियक रोग: 1% भारतीयों में यह आनुवंशिक बीमारी है – ग्लूटेन से आंतें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

ग्लूटेन संवेदनशीलता (NCGS): 6-10% लोगों को सूजन, थकान, दस्त, स्किन रैशेज।

FODMAPs: गेहूं में फ्रक्टेन्स नामक कार्ब्स IBS को ट्रिगर करते हैं।

डॉक्टर की सलाह: गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. अनीता शर्मा कहती हैं, “गेहूं छोड़ने से 70% IBS मरीजों को राहत मिलती है।”

3. कीटनाशक और ब्लीचिंग का जहर

ग्लाइफोसेट: भारत में गेहूं की फसल पर इस्तेमाल होने वाला खरपतवार नाशक, WHO ने इसे ‘संभावित कार्सिनोजन’ घोषित किया।

बेंजोइल पेरोक्साइड/ऑलॉक्सन: मैदा को सफेद करने के लिए केमिकल ब्लीचिंग – लिवर और किडनी पर दुष्प्रभाव।

2025 स्टडी (NIN): 68% आटे के सैंपल्स में कीटनाशक अवशेष पाए गए।

4. एंटी-न्यूट्रिएंट्स और पाचन पर बोझ

फाइटिक एसिड: गेहूं में मौजूद, जो आयरन, जिंक, कैल्शियम के अवशोषण को 50-80% रोकता है।

लेक्टिन: आंत की दीवार को नुकसान, ‘लीकी गट’ का कारण।

ऑक्सलेट: किडनी स्टोन का खतरा।

कब है गेहूं का आटा सुरक्षित?

साबुत गेहूं (आटा with चोकर): GI 50-55, फाइबर 12 ग्राम/100 ग्राम।

खट्टा आटा (Sourdough): लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया फाइटेट्स को तोड़ता है, पाचन आसान।

स्प्राउटेड आटा: अंकुरित गेहूं में पोषक तत्व 300% बढ़ जाते हैं।

क्या करें? स्वस्थ विकल्प

विकल्प, फायदे, कैसे इस्तेमाल करें

ज्वार/बाजरा आटा

जीरो ग्लूटेन, कम GI, आयरन भरपूर

रोटी, ढोकला

रागी (नाचनी)

कैल्शियम का खजाना, वजन घटाने में मदद

रोटी, porridge

कुट्टू/सिंघाड़ा

उपवास में भी OK, फाइबर high

पूरी, हलवा

बादाम/नारियल आटा

कीटो फ्रेंडली, प्रोटीन high

केक, रोटी

विशेषज्ञ सलाह

डायटीशियन रुचिता गुप्ते: “सप्ताह में 3 दिन गेहूं मुक्त रहें। साबुत अनाज चुनें।”

ICMR गाइडलाइन 2025: दैनिक आहार में 50% साबुत अनाज, 30% सब्जियां, 20% प्रोटीन।

निष्कर्ष

गेहूं का आटा अपने आप में ‘जहर’ नहीं, लेकिन रिफाइंड, केमिकल युक्त और अत्यधिक मात्रा में लिया जाए तो नुकसानदायक है। जैसे नमक जरूरी है, लेकिन ज्यादा हो तो ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। समझदारी का इस्तेमाल करें:

चोकर युक्त आटा लें

खट्टा या अंकुरित आटा अपनाएं

विविधता लाएं – हर दिन एक ही आटा न खाएं

स्वास्थ्य आपकी थाली से शुरू होता है। आज से एक कदम उठाएं – अपना आटा बदलें, जीवन बदलें।

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