उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण मामले में ली स्वतः संज्ञान, DM-DFO से रिपोर्ट मांगी—6 नवंबर को अगली सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण मामले में ली स्वतः संज्ञान, DM-DFO से रिपोर्ट मांगी—6 नवंबर को अगली सुनवाई
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग, राजकीय राजमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, वन भूमि और राजस्व भूमि पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जे. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अगली तिथि 6 नवंबर 2025 तय की है। कोर्ट ने राज्य सरकार के पूर्व शपथ पत्र से संतुष्टि नहीं जताई, और PIL का दायरा बढ़ाते हुए सभी जिलों के DM (जिलाधिकारी) और DFO (वन अधिकारी) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
PIL का आधार: पदमपुरी में अतिक्रमण की शिकायत
मामला दिल्ली निवासी एक व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ, जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर नैनीताल के पदमपुरी में वन विभाग की भूमि और सड़क किनारे अतिक्रमण का आरोप लगाया। याचिकाकर्ता ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कब्जे हो रहे हैं, जो पर्यावरण और सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कोर्ट ने इसे स्वतः संज्ञान में लेते हुए PIL दर्ज किया, और पूरे राज्य में वन, राजस्व भूमि, राजमार्गों पर अतिक्रमण की जांच का आदेश दिया।
कोर्ट का सख्त रुख: सरकार की रिपोर्ट से असंतुष्टि
खंडपीठ ने राज्य सरकार के शपथ पत्र पर नाराजगी जताई, जिसमें गड्ढों और कार्रवाई की जानकारी अधूरी बताई गई। कोर्ट ने कहा, “गांव-गांव स्तर पर सर्वे कर रिपोर्ट दें। अतिक्रमण हटाने की समयसीमा बताएं।” DM और DFO को 6 नवंबर तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला 2023 के हाईकोर्ट के आदेशों का फॉलो-अप है, जहां अतिक्रमण हटाने के लिए ऐप बनाने का सुझाव दिया गया था।
प्रभाव: पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
यह PIL उत्तराखंड में बढ़ते अतिक्रमण पर रोक लगाने का प्रयास है। 2024 में 5,000 एकड़ वन भूमि अतिक्रमण से मुक्त हुई थी, लेकिन सड़क किनारे कब्जे बढ़ रहे हैं। सरकार ने सतर्कता बरतने का वादा किया है। सुनवाई जारी रहेगी।
