धर्म

देवउठनी एकादशी 2025: भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां, वरना टल सकता है विवाह और सुख-समृद्धि

देवउठनी एकादशी 2025: भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां, वरना टल सकता है विवाह और सुख-समृद्धि

आज (1 नवंबर) देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी है – वह पावन तिथि जब चार माह की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और शुभ कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि) का श्रीगणेश होता है। लेकिन इस दिन कुछ निषिद्ध कार्य हैं, जिन्हें करने से लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और विवाह में विलंब, आर्थिक हानि या संतान सुख में बाधा आ सकती है। आइए, जानते हैं 10 ऐसी गलतियां जिन्हें भूलकर भी न करें:

1. तुलसी का अपमान न करें

गलती: तुलसी तोड़ना, सूखी पत्तियां फेंकना या मंदिर में जल न चढ़ाना।

परिणाम: माता लक्ष्मी का क्रोध, विवाह में बाधा।

करें: सुबह तुलसी को जल, दूध, फूल चढ़ाएं। दीप जलाएं।

2. लहसुन-प्याज का सेवन बंद

गलती: भोजन में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा।

परिणाम: पाप लगता है, पूजा का फल नष्ट।

करें: सात्विक भोजन – फल, दूध, खिचड़ी, आलू की सब्जी।

3. बाल-नाखून न काटें

गलती: एकादशी पर शेविंग, हेयर कट या नाखून काटना।

परिणाम: पितृ दोष, आयु में कमी।

करें: दशमी (31 अक्टूबर) को ही ये कार्य कर लें।

4. चावल न खाएं

गलती: चावल का सेवन (खासकर दक्षिण भारत में वर्जित)।

परिणाम: चंद्रमा का अपमान, मानसिक अशांति।

करें: जौ, साबूदाना, मखाना, आलू का भोजन।

5. झूठ, क्रोध और निंदा से बचें

गलती: किसी की बुराई करना, गुस्सा करना, झूठ बोलना।

परिणाम: विष्णु भक्ति नष्ट, पाप लगता है।

करें: मौन व्रत या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जप।

6. शाम को पूजा न छोड़ें

गलती: शाम की आरती या तुलसी विवाह न करना।

परिणाम: घर में सुख-शांति में कमी।

करें: शाम 5:30 से 7:00 बजे के बीच तुलसी-शालिग्राम विवाह करें।

7. काले कपड़े न पहनें

गलती: काला, नीला या भूरे रंग के कपड़े।

परिणाम: नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है।

करें: पीला, सफेद या हरा वस्त्र धारण करें।

8. सोने-चांदी के बर्तन में भोजन न करें

गलती: सोने-चांदी के बर्तन में खाना।

परिणाम: लक्ष्मी का अपमान।

करें: मिट्टी, स्टील या तांबे के बर्तन में भोजन।

9. दान न भूलें

गलती: गरीब, ब्राह्मण को दान न देना।

परिणाम: पुण्य नष्ट, धन हानि।

करें: अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा दान करें।

10. रात में सोना निषिद्ध

गलती: रात में सो जाना।

परिणाम: विष्णु जागरण का फल नहीं मिलता।

करें: रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन, रामायण पाठ।

शुभ मुहूर्त (1 नवंबर 2025)

कार्य                    समय

ब्रह्म मुहूर्त पूजा        सुबह 4:30 – 6:00 AM

तुलसी विवाह          शाम 5:33 – 7:12 PM

व्रत पारण               2 नवंबर, सुबह 6:30 – 8:45 AM

विशेष टिप: तुलसी विवाह कैसे करें?

तुलसी को स्नान कराएं, लाल चुनरी ओढ़ाएं।

शालिग्राम को पीले वस्त्र पहनाएं।

11 या 21 परिक्रमा, मंत्र: “ॐ तुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि, तन्नो वृंदा प्रचोदयात्”

खीर, पुए का भोग लगाएं।

संदेश:

“जो देवउठनी एकादशी को तुलसी-विष्णु की पूजा करता है, उसे सौ यज्ञों का फल मिलता है।”

– पद्म पुराण

इस पावन दिन शुद्ध मन, सात्विक भोजन और भक्ति भाव रखें।

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