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वैकुंठ चतुर्दशी 2025: 4 नवंबर को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

वैकुंठ चतुर्दशी 2025: 4 नवंबर को, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी पर विष्णु-शिव की एक साथ पूजा, वैकुंठ लोक प्राप्ति का दुर्लभ योग

हिंदू पंचांग के अनुसार वैकुंठ चतुर्दशी 2025 4 नवंबर (मंगलवार) को मनाई जाएगी। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है, जो देव दीवाली (5 नवंबर) से एक दिन पहले आता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु और शिव की एक साथ पूजा का विशेष महत्व है। निशीथ काल में विष्णु पूजा और अरुणोदय काल में शिव पूजा फलदायी।

शुभ मुहूर्त (उज्जैन/दिल्ली के अनुसार):

चतुर्दशी आरंभ: 4 नवंबर, सुबह 2:05 बजे

चतुर्दशी समाप्त: 4 नवंबर, रात 10:36 बजे

निशीथ पूजा मुहूर्त (विष्णु): रात 11:58 बजे से 12:49 बजे (5 नवंबर)

अरुणोदय पूजा मुहूर्त (शिव): सुबह ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले)

व्रत पारण: 5 नवंबर, पूर्णिमा पर।

पूजा विधि:

सुबह स्नान: पवित्र नदी/घर में।

व्रत संकल्प: फलाहार या निर्जला।

पूजन: विष्णु को 1000 कमल चढ़ाएं, सहस्रनाम पाठ। शिव को बेलपत्र।

आरती: धूप, दीप, चंदन।

दान: तिल, अनाज, वस्त्र। वाराणसी में मणिकर्णिका घाट स्नान विशेष।

महत्व व कथा:

शिव पुराण के अनुसार, विष्णु ने काशी में शिव को 1000 कमल चढ़ाए। अंतिम कमल के लिए अपनी आंख दान की, तब शिव प्रसन्न। इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर वैकुंठ के समान। व्रत से मोक्ष, पाप नाश। वाराणसी, ऋषिकेश, गया में भव्य आयोजन।

विशेष: ज्योतिषी कहते हैं, “यह हरिहर मिलन का दिन। पूजा से वैकुंठ प्राप्ति।”

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