Monday, September 14, 2026
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142 दिनों की योगनिद्रा के बाद जागेंगे श्रीहरि: देवउठनी एकादशी पर बजेंगी शहनाइयां, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

142 दिनों की योगनिद्रा के बाद जागेंगे श्रीहरि: देवउठनी एकादशी पर बजेंगी शहनाइयां, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

हिंदू पंचांग के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की चार महीने लंबी चातुर्मास की योगनिद्रा का अंतिम चरण समाप्त हो चुका है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से शुरू हुई यह निद्रा अब 142 दिनों बाद समाप्त हो रही है। 1 नवंबर 2025 को कार्तिक शुक्ल एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी) के दिन श्रीहरि क्षीरसागर से जागेंगे। इस पावन अवसर पर भक्तों का उत्साह चरम पर है, क्योंकि भगवान के जागते ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9:11 बजे से प्रारंभ होकर 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे तक रहेगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी (12 जुलाई 2025) को भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी के आग्रह पर वर्षा ऋतु में चार महीने की योगनिद्रा में प्रवेश किया था। इस दौरान देवता भी निद्रा में चले जाते हैं, और पृथ्वी पर संजीवनी बूटी जैसी औषधियां तैयार होती हैं, जो धरती को उपजाऊ बनाती हैं। एक कथा के मुताबिक, राजा बलि के दानवीर होने पर भगवान वामन अवतार ने उनसे तीन पग भूमि मांगी। बलि के वचन के बाद भगवान ने आकाश-पाताल नाप लिया और तीसरे पग के लिए बलि को पाताल भेज दिया, लेकिन उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर हर वर्ष चार महीने पृथ्वी पर राज करने का वरदान दिया। इस वादे के कारण ही श्रीहरि चातुर्मास में निद्रा में जाते हैं।

देवउठनी एकादशी का महत्व अतुलनीय है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं, पापों का नाश होता है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। पूजा विधि सरल लेकिन विधि-विधान वाली है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। तुलसी पत्र, फूल, चंदन, धूप-दीप से अभिषेक करें। ‘उठो देव, बैठो देव’ मंत्रों के साथ शंख-घंटी बजाकर जगाएं। फिर पंचामृत से भोग लगाएं और तुलसी को जल अर्पित करें। शाम को भगवान को रथ पर भ्रमण कराएं। विशेष रूप से, 2 नवंबर को तुलसी विवाह का आयोजन होगा, जहां भक्त शालिग्राम और तुलसी का प्रतीकात्मक विवाह रचाएंगे।

इस एकादशी से विवाह मुहूर्तों की बहार आ जाएगी। नवंबर में 2, 3, 5, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 नवंबर शुभ हैं। दिसंबर में भी कई तिथियां उपलब्ध होंगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, इस दिन जागने पर श्रीहरि की विशेष कृपा कुछ राशियों पर बरसेगी। मेष राशि वालों को आर्थिक लाभ और सुखद समाचार मिलेगा। कर्क राशि के व्यापार में प्रगति और सहयोग की प्राप्ति होगी। सिंह राशि के लिए नौकरी में उन्नति के योग हैं, जबकि तुला राशि में वैवाहिक जीवन सुखमय बनेगा। वृश्चिक राशि वालों को धन लाभ के संकेत हैं।

चातुर्मास के अंत के साथ ही धार्मिक उत्साह बढ़ गया है। मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और रथयात्राएं आयोजित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्व न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। भक्तों से अपील है कि पूजा के दौरान तामसिक भोजन से परहेज करें और सात्विक जीवन अपनाएं। कुल मिलाकर, श्रीहरि का जागरण नई शुरुआत का संदेश देता है, जो जीवन में समृद्धि और शांति लाएगा।

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