बिहार चुनाव 2025: पंचायत-ग्राम पंचायत मुखिया को पेंशन, तेजस्वी के 5 बड़े वादे—मानदेय दोगुना, कामगारों को 5 लाख की मदद
बिहार चुनाव 2025: पंचायत-ग्राम पंचायत मुखिया को पेंशन, तेजस्वी के 5 बड़े वादे—मानदेय दोगुना, कामगारों को 5 लाख की मदद
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और RJD नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई बड़े वादे किए। उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीण-शहरी विकास पर फोकस करते हुए कहा कि सरकार बनने पर त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों (मुखिया, सरपंच आदि) और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों को पेंशन दी जाएगी। इसके अलावा, इनका मानदेय और भत्ता दोगुना किया जाएगा। तेजस्वी ने कहा, “बिहार की जनता बदलाव के लिए बेसब्र है। हम जहां भी जा रहे हैं, सभी जातियों-धर्मों के लोग समर्थन में आ रहे हैं। मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार और अपराध में डूबी है।” ये वादे ग्रामीण वोटबैंक को साधने की रणनीति के तहत हैं, जहां पंचायत प्रतिनिधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तेजस्वी के 5 बड़े वादे: विकास और कल्याण पर जोर
तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुल 5 प्रमुख घोषणाएं कीं, जो पंचायती राज, छोटे कामगारों और स्थानीय निकायों को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। ये वादे ‘चिंता मुक्त बिहार’ के विजन का हिस्सा हैं:
1. पंचायत प्रतिनिधियों को पेंशन और बीमा: त्रिस्तरीय पंचायत (मुखिया, सरपंच आदि) और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों को सम्मानजनक पेंशन योजना शुरू की जाएगी। साथ ही, 50 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। तेजस्वी ने कहा, “ये प्रतिनिधि लोकतंत्र की रीढ़ हैं, उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।”
2. मानदेय और भत्ता दोगुना: वर्तमान मानदेय को दोगुना कर दिया जाएगा, जिससे पंचायत स्तर पर काम करने वाले प्रतिनिधियों की मासिक आय बढ़ेगी। यह कदम ग्रामीण विकास को गति देने के लिए उठाया जाएगा।
3. छोटे कामगारों को 5 लाख की एकमुश्त मदद: नाई, बढ़ई, लोहार, कुम्हार जैसे पारंपरिक कामगारों को स्वरोजगार के लिए 5 लाख रुपये की ब्याज-मुक्त सहायता राशि दी जाएगी। यह योजना 5 साल तक चलेगी, ताकि मेहनतकश वर्ग आत्मनिर्भर बने।
4. PDS डीलरों की मार्जिन मनी में वृद्धि: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के डीलरों की मार्जिन मनी (कमीशन) को काफी बढ़ाया जाएगा। तेजस्वी ने कहा, “PDS डीलर गरीबों के राशन के रखवाले हैं, उनकी मेहनत का पूरा सम्मान मिलेगा।”
5. स्थानीय निकायों को सशक्तिकरण: पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी, जिसमें ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और विकास कार्यों में पंचायतों को अधिक फंडिंग शामिल है।
ये वादे छठ महापर्व के दौरान दिए गए, जब तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर बिहार में ‘हर घर नौकरी’ और ‘माई-बहिन मान योजना’ जैसे पुराने वादों को भी पूरा किया जाएगा। उन्होंने BJP-NDA पर निशाना साधते हुए कहा, “बिहार में जानबूझकर कारखाने नहीं लगने दिए गए। अगर चाचा (नीतीश) पलटते नहीं, तो हम और आगे बढ़ जाते।”
चुनावी समीकरण पर असर: ग्रामीण वोटबैंक को निशाना
ये घोषणाएं बिहार के 2.5 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण कामगारों को लक्षित करती हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में वोटिंग का बड़ा हिस्सा हैं। NDA ने इसे ‘झूठे वादे’ बताते हुए तंज कसा कि RJD पहले ही 17 महीने के शासन में कुछ नहीं कर पाई। लेकिन तेजस्वी ने जवाब दिया, “जनता 20 महीने का इंतजार कर लेगी, लेकिन जंगलराज नहीं सहनगी।” पहले चरण की 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा, और ये वादे महागठबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
क्या ये वादे बिहार की जनता को लुभा पाएंगे? चुनावी घमासान तेज हो गया है।
