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सतारा लेडी डॉक्टर आत्महत्या मामला: आरोपी सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदाने गिरफ्तार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत बनकर पहले ही हिरासत में

सतारा लेडी डॉक्टर आत्महत्या मामला: आरोपी सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदाने गिरफ्तार, सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत बनकर पहले ही हिरासत में

महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण उपजिला अस्पताल में तैनात 28 वर्षीय महिला डॉक्टर डॉ. संपदा मुंडे की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। शनिवार तड़के फरार आरोपी सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदाने को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले शुक्रवार को सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत बनकर (या बांकर) को पुणे के एक फार्महाउस से हिरासत में लिया गया था। डॉक्टर ने मौत से पहले अपनी हथेली पर सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें बदाने पर 4 महीनों से लगातार बलात्कार और बनकर पर मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया गया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ बलात्कार और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप दर्ज किए हैं।

घटना गुरुवार (24 अक्टूबर) रात फलटण के एक निजी होटल में हुई। डॉ. मुंडे, जो मूल रूप से बीड जिले की रहने वाली थीं, अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थीं। सूचना मिलने पर पहुंची फलटण सिटी पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। सुसाइड नोट में डॉक्टर ने लिखा था, “सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदाने ने 4 महीने तक रेप किया… MP का दबाव, फिट को अनफिट बनाने का प्रेशर… अब और सहन नहीं कर सकती।” एक 4-पेज का अतिरिक्त शिकायत पत्र भी मिला, जिसमें एक सांसद और उनके दो PA पर गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने का राजनीतिक दबाव डालने का आरोप लगाया गया। मृतका के चचेरे भाई ने बताया कि डॉक्टर ने पहले सतारा एसपी और डीएसपी को शिकायत की थी कि अगर उनके साथ कुछ होता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सतारा एसपी तुषार दोशी ने बताया, “प्रशांत बनकर को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके फोन रिकॉर्ड्स और मैसेजेस से पुष्टि हुई कि सुसाइड से ठीक पहले डॉक्टर से उसकी बात हुई थी। बदाने को शनिवार तड़के गिरफ्तार किया गया। दोनों को आज (26 अक्टूबर) कोर्ट में पेश किया जाएगा।” बदाने को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देश पर पहले ही निलंबित कर दिया गया था। पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (बलात्कार), 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज किया है। विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी गई है, जो सभी आरोपों की गहन जांच करेगा।

मृतका के परिजनों ने कहा, “डॉक्टर पर फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव था। हम न्याय चाहते हैं।” महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने सतारा पुलिस को डॉक्टर की पिछली शिकायतों पर कार्रवाई न करने की जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग अध्यक्ष ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा में कोताही बर्दाश्त नहीं।” इस घटना ने चिकित्सा जगत और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों के संगठनों ने हड़ताल की चेतावनी दी है, जबकि सभी पार्टियों के नेताओं ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, “ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं। दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।”

यह मामला न केवल पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाता है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को उजागर करता है। क्या SIT से न्याय मिलेगा?

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