Tuesday, June 30, 2026
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छठ महापर्व का दूसरा दिन आज: खरना पूजन की विधि और महत्व

छठ महापर्व का दूसरा दिन आज: खरना पूजन की विधि और महत्व

लोक आस्था के महापर्व छठ का दूसरा दिन ‘खरना’ (लोहंडा) आज मनाया जा रहा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के साथ व्रती महिलाएं 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत करती हैं। यह दिन शुद्धता, आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक है। आइए जानें खरना पूजन की सरल विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व के बारे में।

खरना पूजन की तिथि और शुभ मुहूर्त (2025)

– तिथि: 26 अक्टूबर 2025 (रविवार), कार्तिक शुक्ल द्वितीया।

– द्वितीया तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर सुबह 7:30 बजे।

– द्वितीया तिथि समापन: 26 अक्टूबर सुबह 8:45 बजे।

– शुभ पूजा मुहूर्त: शाम 5:00 बजे से 6:30 बजे तक (सूर्यास्त के समय अर्घ्य के लिए आदर्श)।

खरना पूजन की सरल विधि

खरना पूजा घर पर ही की जाती है। व्रती महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं, और शाम को प्रसाद ग्रहण करती हैं। निम्नलिखित सामग्री एकत्र करें: गुड़, चावल, गेहूं का आटा, गन्ना, फल (केला, सेब), सिंघाड़ा, सुपारी, लौंग, इलायची, पान के पत्ते, दूध, घी और दीपक।

1. प्रातःकालीन संकल्प: सूर्योदय से पहले स्नान कर आत्मिक शुद्धि का संकल्प लें। सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करें। दिनभर निर्जला व्रत रखें। घर की साफ-सफाई करें और सकारात्मक विचार रखें।

2. प्रसाद निर्माण: दोपहर में गुड़ की खीर (चावल, दूध और गुड़ से बनी) और गेहूं की रोटी (5 या 7) बनाएं। रोटी चपटी और बिना नमक-मसाले वाली हो। यह प्रसाद सूर्य देव को समर्पित है।

3. शाम की पूजा: स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर चौकी सजाएं, गन्ना और बांस की सीढ़ी रखें। सूर्य देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।

4. अर्घ्य और भोग: सूर्यास्त के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें (जल, फल और प्रसाद अर्बपण करें)। छठी मैया को लौंग, सुपारी, पान और फल चढ़ाएं। मंत्र जपें: “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ छठी मइया की जय”।

5. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद व्रती पहले प्रसाद ग्रहण करें (खीर और रोटी), फिर परिवार को वितरित करें। व्रत तोड़ने के बाद अगले 36 घंटे तक निर्जला रहें।

खरना का धार्मिक महत्व

खरना का अर्थ ‘शुद्धता’ है, जो व्रती के तन-मन की पवित्रता का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी को संतान न होने पर छठी मैया प्रकट हुईं। उन्होंने खरना व्रत का संकल्प लिया, जिससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इस दिन निर्जला व्रत से आत्मसंयम बढ़ता है, और सूर्य देव-छठी मैया प्रसन्न होकर सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और संतान सुख का आशीर्वाद देते हैं। यह व्रत परिवार में एकता और प्रकृति पूजा को मजबूत करता है।

छठ महापर्व 28 अक्टूबर को उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। इस दिन की भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। व्रती सावधानी बरतें: व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों से दूर रहें। क्या आप भी खरना मना रहे हैं?

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