राष्ट्रीय

मेरठ: 30 साल पुराना सेंट्रल मार्केट ध्वस्त, SC के आदेश पर चला बुलडोजर, 22 दुकानें मिट्टी में मिलीं; व्यापारियों में कोहराम

मेरठ: 30 साल पुराना सेंट्रल मार्केट ध्वस्त, SC के आदेश पर चला बुलडोजर, 22 दुकानें मिट्टी में मिलीं; व्यापारियों में कोहराम

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में शनिवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारी बुलडोजर एक्शन चलाया गया। लगभग 30-35 साल पुराने इस व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स की 22-25 दुकानें धराशायी हो गईं। आवासीय भूमि पर अवैध रूप से बने इस निर्माण को गिराने की कार्रवाई में व्यापारियों के बीच कोहराम मच गया। कई दुकानदार फूट-फूटकर रोए, जबकि प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के आदेश का पालन करते हुए की गई, जिसमें 90 दिनों के भीतर ध्वस्तीकरण का निर्देश था। लगभग 10 महीने बाद शनिवार को यह ऐक्शन अंजाम दिया गया।

घटना शास्त्रीनगर सेक्टर-6 के प्लॉट नंबर 661/6 पर बने सेंट्रल मार्केट से जुड़ी है। यह कॉम्प्लेक्स 1986 में अवैध रूप से बनाया गया था, जब आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं दी थी। आवास विकास परिषद ने 19 सितंबर 1990 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन व्यापारियों ने अदालतों में अपील देकर कार्रवाई टाल दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर 2014 को ध्वस्तीकरण का आदेश दिया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को मुहर लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक उपयोग अवैध है, और इसे तत्काल हटाया जाए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट का 10 साल पुराना निर्णय सही था, और व्यापारियों की समयसीमा बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी।

शुक्रवार शाम से ही आवास विकास परिषद ने लाउडस्पीकर से मुनादी कराकर दुकानें खाली कराने का ऐलान किया। रातभर व्यापारियों में हड़बड़ी मची रही—कई ने अपना सामान घर ले जाकर रखा, तो कुछ ने किराये पर गोदाम ले लिया। शनिवार सुबह 7 बजे बुलडोजर पहुंचे, और दोपहर तक 22 दुकानें जमींदोज हो गईं। मौके पर भारी पुलिस बल, अग्निशमन वाहन और जिला प्रशासन के अधिकारी तैनात थे। वाहनों का आवागमन रोक दिया गया, और आसपास के इलाके को सील कर दिया गया। एक व्यापारी ने रोते हुए कहा, “यह हमारा रोजगार था। 30 साल की कमाई मिट्टी में मिल गई। कोर्ट ने सुनी क्यों नहीं?” एक अन्य ने बताया, “सामान निकालते वक्त ही सब कुछ बर्बाद हो गया। अब कहां जाएं?”

मेरठ के डीएम दीपक मेहता ने कहा, “यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार है। अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमने व्यापारियों को पर्याप्त समय दिया था।” एसएसपी नीरज कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था पर जोर देते हुए बताया कि कोई हादसा न हो, इसके लिए 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे। यह कार्रवाई मेरठ में अन्य अवैध निर्माणों के लिए नजीर बनेगी। शहर में 867 से ज्यादा दुकानें इसी तरह आवासीय भूमि पर बनी हैं, जिन्हें चिन्हित कर नोटिस दिए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पर भी ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है, जिससे 2,000 परिवार प्रभावित हो सकते हैं।

व्यापारियों ने अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना बनाई है। स्थानीय संगठनों ने प्रशासन पर ‘एकतरफा कार्रवाई’ का आरोप लगाया है। यह घटना न केवल मेरठ के ‘सिटी ऑफ हार्ट’ को झकझोर रही है, बल्कि अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्ती का संदेश दे रही है। क्या व्यापारियों को राहत मिलेगी, या यह ध्वस्तीकरण की श्रृंखला का आगाज है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *