राजनीति

बिहार चुनाव 2025 से राहुल गांधी की दूरी: गठबंधन कलह, रणनीतिक सतर्कता या ‘वोट चोरी’ का डर?

बिहार चुनाव 2025 से राहुल गांधी की दूरी: गठबंधन कलह, रणनीतिक सतर्कता या ‘वोट चोरी’ का डर?

बिहार विधानसभा चुनाव की धूम मचाने के बीच महागठबंधन के दिग्गज नेता तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा घोषित करने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की तस्वीर गायब रही। यह दूरी नई नहीं है—लोकसभा चुनाव के बाद ‘वोटर अधिकार यात्रा’ (जुलाई-अगस्त 2025) के बाद से राहुल बिहार नहीं लौटे। विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है, तो सवाल उठ रहा है: आखिर राहुल गांधी चुनावी मैदान से क्यों दूर हैं? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महागठबंधन की आंतरिक कलह, कांग्रेस की सीट शेयरिंग पर सख्ती और ‘वोट चोरी’ के आरोपों का नतीजा है।

राहुल की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा तब उभरी जब 22 अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। पोस्टर पर सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर थी, जबकि राहुल और प्रियंका गांधी की फोटो गायब। स्वतंत्र सांसद पप्पू यादव ने इसे ‘गलत संदेश’ बताया, कहा कि “बिहार सिर्फ राहुल के चेहरे पर जीत सकता है।” एनडीए के चिराग पासवान ने तंज कसा, “महागठबंधन में सब खत्म हो चुका, अशोक गहलोत तो आ गए, राहुल गांधी कहां हैं?” भाजपा ने इसे ‘सम्मान चोरी’ का नाम दिया, दावा किया कि आरजेडी कांग्रेस को दबा रही है।

मुख्य वजह सीट शेयरिंग की जंग लग रही है। महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दलों और मुकेश साहनी की वीआईपी के बीच 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ का ऐलान हो चुका है। कांग्रेस ने 60-70 सीटों की मांग की, लेकिन आरजेडी ने सिर्फ 54 ऑफर कीं। नई PCC चीफ और इन-चार्ज कृष्णा अल्लावरू (राहुल के करीबी) ने सख्त रुख अपनाया, पुरानी सीटें जैसे काहलगांव, बछवाड़ा पर अड़े। जेएमएम ने तो गठबंधन छोड़ 6 सीटों पर स्वतंत्र लड़ने का फैसला लिया। अशोक गहलोत ने इसे ‘एकजुटता का प्रतीक’ बताया, लेकिन स्रोतों के मुताबिक राहुल ने तेजस्वी से मुलाकात टाली क्योंकि सीट विवाद सुलझा नहीं।

राहुल की चुप्पी तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने पर भी सवाल खड़े कर रही। अगस्त 2025 में तेजस्वी ने राहुल को 2029 का पीएम कैंडिडेट बताया, लेकिन कांग्रेस ने बिहार के लिए तेजस्वी का समर्थन नहीं किया। एक वायरल तस्वीर में राहुल को तेजस्वी के पीछे दिखाया गया, जो सोशल मीडिया पर ‘राहुल का दबंग तेजस्वी’ मीम्स बना रही। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, “राहुल राष्ट्रीय नेता हैं, बिहार में तेजस्वी का वर्चस्व है। गांधी परिवार आरजेडी के परिवारवाद को हमेशा सॉफ्टली हैंडल करता रहा, लेकिन अब कांग्रेस अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है।”

एक और कोण ‘वोट चोरी’ का है। राहुल ने जुलाई-अगस्त में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को ‘चुनाव चोरी’ बताया, दावा किया कि दलित, महादलित और प्रवासियों के नाम काटे जा रहे। ईसी ने इसे खारिज किया, लेकिन राहुल ने पटना में मार्च निकाला। अब चुनाव नजदीक आते ही वे जोखिम लेना नहीं चाहते, खासकर जब भाजपा ‘वोट बैंक’ बचाने का आरोप लगा रही। जून 2025 में दरभंगा में उनके कार्यक्रम पर दो FIR हुईं, जिसे राहुल ने ‘सम्मान का बैज’ बताया।

गहलोत ने सफाई दी कि राहुल और तेजस्वी जल्द कैंपेन करेंगे। लेकिन एक्स पर ट्रेंडिंग #RahulInBihar में यूजर्स पूछ रहे, “राहुल कहां गायब?” भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने कहा, “महागठबंधन टूट चुका, राहुल भाग रहे हैं।” अगर राहुल नहीं आए, तो कांग्रेस की 17 विधायकी सीटें खतरे में। विशेषज्ञों का कहना है, यह दूरी गठबंधन को कमजोर करेगी, लेकिन राहुल राष्ट्रीय फोकस (जैसे छत्तीसगढ़, ओडिशा) पर रहना पसंद कर रहे। बिहार की सियासत अब राहुल की ‘रिटर्न’ का इंतजार कर रही है।

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