क्रिकेट टीम में सरफराज खान की अनदेखी पर सियासत: कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने गौतम गंभीर पर साधा निशाना, ‘सरनेम’ पर उठाए सवाल
क्रिकेट टीम में सरफराज खान की अनदेखी पर सियासत: कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने गौतम गंभीर पर साधा निशाना, ‘सरनेम’ पर उठाए सवाल
भारतीय क्रिकेट में चयन प्रक्रिया पर एक बार फिर सियासी रंग चढ़ गया है। साउथ अफ्रीका-ए के खिलाफ दो फोर-डे मैचों की सीरीज के लिए घोषित इंडिया-ए टीम में मुंबई के धाकड़ बल्लेबाज सरफराज खान को जगह न मिलने से विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार करते हुए टीम के हेड कोच गौतम गंभीर पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरफराज को उनके ‘सरनेम’ (खान) की वजह से नहीं चुना जा रहा है? यह बयान AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के समान आरोपों के बाद आया है, जिसने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बता दिया। BJP ने इसे ‘धर्म कार्ड’ खेलने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है, जबकि क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि सरफराज का फॉर्म ही मुख्य कारण है।
शमा मोहम्मद ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, “क्या सरफराज खान को उनके सरनेम की वजह से नहीं चुना गया? बस पूछ रही हूं। हम जानते हैं कि गौतम गंभीर इस मामले में क्या सोचते हैं।” उन्होंने गंभीर के BJP से जुड़े होने का जिक्र कर कहा कि चयन में पूर्वाग्रह हो रहा है। सरफराज, जो घरेलू क्रिकेट में 110.47 की औसत से 10 शतक और 5 अर्धशतक लगा चुके हैं, को न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट खेलने के बाद (जहां वे असफल रहे) इंडिया-ए में भी नजरअंदाज कर दिया गया।
सरफराज खान का चयन विवाद: क्या है पूरा मामला?
– टीम घोषणा: BCCI ने मंगलवार को 15 सदस्यीय इंडिया-ए टीम का ऐलान किया, जिसमें कप्तान ऋषभ पंत और वाइस-कप्तान साई सुधर्शन हैं। सरफराज को नजरअंदाज कर देवदत्त पडिक्कल, राजत पाटीदार जैसे बल्लेबाजों को मौका दिया गया। सीरीज 30 अक्टूबर से बेंगलोर में शुरू होगी।
– सरफराज का रिकॉर्ड: 2023 में डेब्यू के बाद 11 टेस्टों में 50.5 औसत से 818 रन। लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ 4 पारियों में 0, 0, 30, 15 रन ही बना सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फॉर्म ही बाहर होने का कारण है, न कि कोई भेदभाव।
– फैंस की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर #JusticeForSarfaraz ट्रेंड कर रहा है। कई फैंस ने कहा, “घरेलू क्रिकेट में रॉकस्टार, फिर भी बेंच पर।”
शमा मोहम्मद का हमला: पहले भी विवादों में
शमा मोहम्मद ने गंभीर को निशाने पर लेते हुए कहा कि BJP के पूर्व सांसद होने के नाते वे चयन में पूर्वाग्रह दिखा रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब शमा ने क्रिकेट को राजनीति से जोड़ा है। मार्च 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान उन्होंने रोहित शर्मा को “मोटा खिलाड़ी” और “बेकार कप्तान” कहा था, जिसके बाद उन्हें कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी। ओवैसी ने भी एक्स पर कहा, “सरफराज का चयन न होना मुस्लिम खिलाड़ियों के खिलाफ साजिश है।”
BJP का पलटवार: ‘धर्म कार्ड बेतुका’
BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शमा के बयान को “बीमार मानसिकता” बताते हुए कहा, “कांग्रेस हमेशा क्रिकेट को सांप्रदायिक रंग देती है। सरफराज का फॉर्म खराब है, न कि सरनेम।” पूर्व तेज गेंदबाज अतुल वासन ने कहा, “सरफराज को मौका न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन धर्म से जोड़ना बिल्कुल बेतुका है।” BCCI ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सिलेक्शन कमिटी चीफ अजित अगरकर ने कहा कि चयन फॉर्म और फिटनेस पर आधारित है।
क्रिकेट विशेषज्ञों की राय
– हर्षा भोगले: “सरफराज का घरेलू रिकॉर्ड शानदार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंसिस्टेंसी की जरूरत। गंभीर का कोचिंग स्टाइल स्ट्रिक्ट है।”
– राहुल द्रविड़ (पूर्व कोच): “चुनाव में युवाओं को मौका देना जरूरी, लेकिन सरफराज जैसे टैलेंट को इग्नोर न करें।”
यह विवाद क्रिकेट को राजनीति की चपेट में ले आया है। क्या सरफराज को जल्द मौका मिलेगा? या यह बहस चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर देगी? क्रिकेट फैंस और राजनीतिक हलके दोनों की नजरें BCCI पर टिकी हैं।
