बिहार चुनाव 2025: एक के बाद एक नामांकन रद्द, महागठबंधन को झटका; जानें किन वजहों से कैंसल होता है पर्चा
बिहार चुनाव 2025: एक के बाद एक नामांकन रद्द, महागठबंधन को झटका; जानें किन वजहों से कैंसल होता है पर्चा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एक के बाद एक उम्मीदवारों के पर्चे रद्द हो रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पहले चरण के 121 सीटों के लिए नामांकन जांच के बाद कई प्रमुख उम्मीदवारों के नाम कट गए, जबकि दूसरे चरण के लिए भी समान स्थिति बनी हुई है। महागठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है, जहां गठबंधन की आंतरिक कलह और तकनीकी खामियों ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, एनडीए को भी कुछ झटके लगे हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन रद्दीकरण से कई सीटों पर मुकाबला सीधा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति विपक्ष की रणनीति को प्रभावित कर सकती है, जबकि एनडीए को फायदा मिल रहा है।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनके तीन उम्मीदवारों ने बीजेपी के दबाव में नामांकन वापस ले लिया। वहीं, महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे की देरी से कई उम्मीदवारों को नुकसान हुआ।
हालिया रद्दीकरण: प्रमुख उदाहरण
– महागठबंधन को झटका: पूर्वी चंपारण के सुगौली से विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के विधायक शशि भूषण सिंह का नामांकन रद्द हो गया। कारण: अनरजिस्टर्ड पार्टी होने के बावजूद 10 प्रस्तावकों की कमी। इससे एनडीए के राजेश कुमार उर्फ बबलू गुप्ता को मजबूत बढ़त मिली।
– कांग्रेस का नुकसान: ललगंज से कांग्रेस उम्मीदवार आदित्य कुमार राजा ने नामांकन वापस ले लिया। कारण: पार्टी के आंतरिक विवाद और सीट बंटवारे की अनिश्चितता।
– एनडीए प्रभावित: सारण के मार्हौरा से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सीमा सिंह का नामांकन रद्द। अन्य प्रभावित: पूर्व जेडीयू जिला अध्यक्ष अल्टाफ आलम राजू (स्वतंत्र), बीएसपी के आदित्य कुमार और स्वतंत्र विश्वल कुमार। अब मुकाबला आरजेडी के जितेंद्र राय और जन सुराज के अभय सिंह के बीच सिमट गया।
– जन सुराज पर दबाव: प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने उनके तीन उम्मीदवारों को दबाव में नाम वापस लेने पर मजबूर किया। इससे पार्टी की 116 सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या प्रभावित हुई।
– अन्य मामले: तारापुर से VIP के सकलदेव बिंद ने नाम वापस लेकर बीजेपी जॉइन कर ली। गौरा बोराम में आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद के पत्र के बावजूद उम्मीदवार का नाम प्रभावित रहा।
एक रिपोर्ट के अनुसार, जेएमएम ने सीट न मिलने पर पूरी तरह चुनाव से किनारा कर लिया, जो महागठबंधन की कमजोरी दर्शाता है।
नामांकन कैंसल क्यों होता है? मुख्य वजहें
चुनाव आयोग के नियमों के तहत नामांकन पत्र (फॉर्म 2B) की जांच रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा की जाती है। यदि कोई खामी पाई जाती है, तो पर्चा रद्द हो जाता है। प्रमुख कारण:
– तकनीकी खामियां: फॉर्म में अधूरे खंड, गलत जानकारी या साइनेचर की कमी। उदाहरण: मार्हौरा में सीमा सिंह का मामला।
– प्रस्तावकों की कमी: मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/राज्य दलों के उम्मीदवारों को 1 प्रस्तावक चाहिए, लेकिन अनरजिस्टर्ड पार्टियों (जैसे VIP) के लिए 10 जरूरी। सुगौली का केस इसी का उदाहरण।
– स्वीकृति प्रमाणपत्र (Form A) की कमी: गैर-मान्यता प्राप्त दलों के उम्मीदवारों को पार्टी अध्यक्ष का प्रमाणपत्र चाहिए। बिना इसके नाम रद्द।
– वोटर लिस्ट में नाम न होना: उम्मीदवार का नाम मतदाता सूची में न हो या गलत EPIC नंबर। हालिया SIR (Special Intensive Revision) में 47 लाख नाम कटे, जिससे कई प्रभावित।
– आर्थिक मानदंड: सिक्योरिटी डिपॉजिट न जमा करना (सामान्य: 10,000 रुपये, SC/ST: 5,000 रुपये)।
– स्वैच्छिक वापसी: दबाव, गठबंधन विवाद या पार्टी निर्देश पर। जन सुराज के तीन मामलों में यही हुआ।
– अन्य: आयु प्रमाण, जाति प्रमाणपत्र या शपथ-पत्र में गड़बड़ी।
बता दें कि पहले चरण में 4 उम्मीदवारों के नाम रद्द हुए, जो निष्पक्ष जांच का नतीजा हैं।
राजनीतिक प्रभाव: विपक्ष की एकता पर खतरा
ये रद्दीकरण महागठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, जहां आरजेडी-कांग्रेस के बीच 11 सीटों पर विवाद है। जेएमएम का बाहर होना और VIP के बिंद का बीजेपी में जाना विपक्ष की वोटों का ध्रुवीकरण बिगाड़ रहा है। वहीं, एनडीए ने समय पर उम्मीदवार घोषित कर कैंपेनिंग शुरू कर दी है। चिराग पासवान ने कहा, “महागठबंधन ने कई सीटों पर वॉकओवर दे दिया।” पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को है, और परिणाम 14 नवंबर को।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी रद्दीकरण पारदर्शी हैं, और उम्मीदवार अपील कर सकते हैं। यह घटनाक्रम बिहार चुनाव को और रोचक बना रहा है—क्या विपक्ष संभलेगा या एनडीए की लहर मजबूत होगी?
