गोवर्धन पूजा 2025: सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा शुभ मुहूर्त, जानें पूजन विधि, सामग्री और महत्व
गोवर्धन पूजा 2025: सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा शुभ मुहूर्त, जानें पूजन विधि, सामग्री और महत्व
दीवाली की धूम के ठीक अगले दिन आज गोवर्धन पूजा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा यह त्योहार प्रकृति पूजा का प्रतीक है। इस वर्ष अमावस्या तिथि के दो दिनों तक रहने के कारण कुछ असमंजस था, लेकिन अधिकांश पंचांगों (जैसे द्रिक पंचांग) के अनुसार, गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जा रही है। प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर शाम 5:57 बजे शुरू होकर 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे तक रहेगी। शुभ मुहूर्त की बात करें तो सुबह का अभिजीत मुहूर्त 6:30 बजे से 8:47 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय है। शाम का मुहूर्त 3:36 बजे से 5:52 बजे तक है। यदि आप आज सुबह ही पूजा कर रहे हैं, तो जल्दी उठकर तैयार हो जाएं—यह समय प्रकृति और भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने का सबसे शुभ अवसर है।
गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, भगवान कृष्ण की लीला से जुड़ी है। कथा के अनुसार, भक्तों ने इंद्र देव की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की, जिससे क्रोधित इंद्र ने भारी वर्षा की। तब बाल कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी को बचाया। यह त्योहार पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति प्रेम और अहंकार त्याग का संदेश देता है। ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन), गुजरात और राजस्थान में यह विशेष धूमधाम से मनाया जाता है, जहां गायों की परेड और 56 व्यंजनों का अन्नकूट तैयार किया जाता है।
शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी (द्रिक पंचांग के अनुसार)
– प्रतिपदा तिथि: 21 अक्टूबर 2025, शाम 5:57 बजे से शुरू, 22 अक्टूबर 2025, शाम 8:16 बजे तक।
– सुबह का शुभ मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): 6:30 AM से 8:47 AM (यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि सूर्योदय के बाद तिथि वैध रहती है)।
– शाम का शुभ मुहूर्त: 3:36 PM से 5:52 PM।
– नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र शाम 7:32 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए शुभ है।
– क्षेत्रीय भिन्नता: उत्तर भारत (दिल्ली-एनसीआर) में सुबह का समय प्राथमिकता दी जाती है। यदि प्रतिपदा 23 अक्टूबर को भी प्रभावी रही, तो गुजरात में कुछ जगहों पर कल मनाई जा सकती है।
गोवर्धन पूजा की विधि: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
गोवर्धन पूजा सरल लेकिन भावपूर्ण होती है। इसे घर के आंगन या मंदिर में करें। पूजा से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
1. गोवर्धन पर्वत का निर्माण: गाय के गोबर या गीली मिट्टी से छोटा गोवर्धन पर्वत बनाएं। उसके चारों ओर घास, फूल, पत्तियां और रंगोली सजाएं। ऊपर दुर्वा घास और फूल चढ़ाएं।
2. कलश स्थापना: एक कलश में गंगा जल भरें, ऊपर सुपारी, सुपारी, दूर्वा और आम के पत्ते लगाएं। इसे गोवर्धन के पास रखें।
3. पूजन सामग्री: रोली, चंदन, कुमकुम, हल्दी, दूध, दही, घी, शहद, चीनी, फल, पान-सुपारी, अगरबत्ती, दीपक, फूल, बेलपत्र, 56 प्रकार के व्यंजन (अन्नकूट)।
4. पूजा प्रक्रिया:
– गोवर्धन पर्वत पर रोली-चंदन का तिलक लगाएं। दूध, दही, घी, शहद का मिश्रण (पंचामृत) चढ़ाएं।
– भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उन्हें फूल-माला चढ़ाएं। अगरबत्ती और दीप जलाएं।
– गोवर्धन स्तोत्र का पाठ करें। मंत्र जपें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (कम से कम 108 बार)।
– गाय-बछड़े की पूजा करें (यदि संभव हो)। उनके पैरों पर तिलक लगाएं और घास चढ़ाएं।
– अन्नकूट तैयार करें: 56 व्यंजनों का पहाड़ बनाकर भगवान को अर्पित करें। शाम को प्रसाद वितरण करें।
5. आरती और कथा: पूजा के अंत में कृष्ण आरती करें। गोवर्धन कथा का पाठ करें। पूजा के बाद ब्राह्मण या गरीबों को दान दें।
6. समापन: पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत को विसर्जित करें। “हरि ॐ तत्सत” बोलकर समाप्त करें।
टिप्स: पूजा पूर्व दिशा की ओर मुख कर करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक फ्री पूजा रखें। यदि गाय उपलब्ध न हो, तो गोवर्धन पर गाय का चित्र बनाकर पूजा करें।
महत्व और लाभ
यह पूजा वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और समृद्धि का प्रतीक है। इससे परिवार में सुख-शांति आती है, और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है। विशेष रूप से किसानों और पशुपालकों के लिए शुभ।
गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए पूरे मन से पूजा करें। यदि आपके शहर में समय भिन्न हो, तो स्थानीय पंचांग चेक करें.
