राजनीति

बिहार कांग्रेस में EBC टिकट बंटवारे पर मचा बवाल: ‘पैसे वालों को तरजीह’, नेताओं ने लगाए टिकट बेचने के गंभीर आरोप

बिहार कांग्रेस में EBC टिकट बंटवारे पर मचा बवाल: ‘पैसे वालों को तरजीह’, नेताओं ने लगाए टिकट बेचने के गंभीर आरोप

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन प्रक्रिया के बीच महागठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस में आंतरिक कलह ने जोर पकड़ लिया है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) समुदाय के नेताओं ने टिकट वितरण में “पैसे वालों को तरजीह” देने का आरोप लगाते हुए पार्टी हाईकमान पर भ्रष्टाचार का ठप्पा लगाया है। पूर्व विधायक अफाक आलम ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से बातचीत का ऑडियो जारी कर दावा किया कि टिकट 5 करोड़ रुपये में बेचे गए। पटना एयरपोर्ट पर मारपीट और प्रदर्शनकारियों के नारे—”टिकट चोर, गद्दी छोड़”—ने विवाद को सड़क पर उतार दिया। यह कलह महागठबंधन की एकजुटता को चुनौती दे रही है।

कलह की जड़: EBC उम्मीदवारों की अनदेखी

कांग्रेस को महागठबंधन में 40-48 सीटें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन टिकट वितरण में EBC समुदाय के जमीनी नेताओं को नजरअंदाज कर बाहरी या धनी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का आरोप लगा। पूर्व विधायक अफाक आलम (EBC समुदाय से) ने कहा, “पार्टी ने पैसे लेकर टिकट बांटा। राजेश राम, प्रभारी कृष्ण अल्लावरु और CLP लीडर शकील अहमद खान ने 5 करोड़ की उगाही की। पप्पू यादव के पास पैसा जमा हुआ, फिर टिकट मिला।” आलम ने ऑडियो जारी किया, जिसमें वे राम से बात करते सुनाई देते हैं: “पैसे का सौदा हो गया, अब टिकट मिलेगा।” आलम ने समर्थकों से अपील की: “इनका मुंहतोड़ जवाब दो, ताकि आने वाली नस्लें सुधरें।”

पटना एयरपोर्ट पर 15 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस प्रभारी अल्लावरु, अध्यक्ष राम और शकील अहमद पर हमला बोल दिया। विक्रम विधानसभा सीट पर 5 करोड़ में टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने “राजेश राम मुर्दाबाद” के नारे लगाए। पूर्व विधायक बंटी चौधरी ने कहा, “पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी लोगों को टिकट। EBC का न्याय कहां?” आनंद माधव, गजनंद शाही, छत्रपति तिवारी, नागेंद्र प्रसाद विकल, रंजन सिंह, बच्चू प्रसाद सिंह जैसे नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि “बिहार कांग्रेस कुछ नेताओं के निजी एजेंटों के कब्जे में है।”

कांग्रेस का बचाव: ‘आरोप निराधार’

कांग्रेस ने आरोपों को खारिज किया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा, “टिकट को लेकर कोई विवाद नहीं। बैठक के बाद निर्णय लिया गया। आरोप निराधार हैं।” प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने संपर्क न होने पर कोई टिप्पणी नहीं की। पार्टी ने इसे “व्यक्तिगत नाराजगी” बताया, लेकिन EBC नेताओं की अनदेखी से पार्टी का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। EBC बिहार की 36% आबादी है, और कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन इसी समुदाय से है।

महागठबंधन पर असर: वोट बंटने का खतरा

यह कलह महागठबंधन को कमजोर कर रही है। RJD में भी मदन शाह ने टिकट न मिलने पर लालू आवास के बाहर कुर्ता फाड़कर रोया और “टिकट बिकाऊ” का आरोप लगाया। VIP के मुकेश सहनी 60 सीटों की मांग पर अड़े हैं, JMM ने 6 सीटों पर अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। विश्लेषक राकेश कुमार ने कहा, “कांग्रेस में EBC विद्रोह वोट बंटवारी का कारण बनेगा। NDA ने सीट बंटवारा पूरा कर लिया है, जबकि महागठबंधन लड़ रहा है।”

पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को है। कांग्रेस को EBC वोट खोने का डर सता रहा है। नामांकन वापसी (21 अक्टूबर) तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यह विवाद लोकतंत्र के हनन का प्रतीक बन गया है।

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