‘दीये-मोमबत्ती पर खर्चा क्यों? क्रिसमस से सीखो’, अखिलेश यादव के बयान पर BJP का हमला, मचा राजनीतिक बवाल
‘दीये-मोमबत्ती पर खर्चा क्यों? क्रिसमस से सीखो’, अखिलेश यादव के बयान पर BJP का हमला, मचा राजनीतिक बवाल
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का अयोध्या दीपोत्सव पर दिया गया बयान राजनीतिक विवादों का शिकार हो गया। लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश ने कहा, “भगवान राम के नाम पर एक सुझाव दूंगा। दुनिया भर में क्रिसमस पर शहर महीनों जगमगाते रहते हैं। हमें उनसे सीखना चाहिए। हम क्यों सिर्फ एक दिन के लिए दीये जलाते हैं? दीये-मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों?” इस बयान ने BJP को भड़का दिया, जिसने इसे “हिंदू त्योहारों का अपमान” करार दिया। अयोध्या दीपोत्सव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां 26 लाख दीयों का प्रज्वलन होगा, लेकिन अखिलेश का बयान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को नया मोड़ दे रहा है।
अखिलेश का बयान अयोध्या के 9वें दीपोत्सव के एक दिन पहले आया, जो 17 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। कार्यक्रम में 2100 वैदिक विद्वान सामूहिक आरती करेंगे, 1100 ड्रोन शो होगा, और 33000 स्वयंसेवक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि हैं, और यह आयोजन राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर हो रहा है। अखिलेश ने आगे कहा, “इस सरकार से क्या उम्मीद? इसे हटाना चाहिए।” उनका इशारा योगी सरकार की आलोचना पर था, जो BJP ने “राम भक्ति का विरोध” बता दिया।
BJP ने तीखा प्रहार किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाली SP अब दीपोत्सव पर सवाल उठा रही है। अयोध्या को अंधेरे में रखने वाली पार्टी अब हिंदू त्योहारों पर सवाल कर रही है।” BJP प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा, “अखिलेश जी, क्रिसमस पर लाइटिंग महीनों चलती है, लेकिन दीपोत्सव राम की जन्मभूमि का प्रतीक है। क्या आप राम को क्रिसमस से तुलना करना चाहते हैं?” सोशल मीडिया पर #AkhileshInsultsDiwali ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने अखिलेश को “राम विरोधी” कहा। एक यूजर ने लिखा, “SP ने अयोध्या को जेल बनाया था, अब दीपोत्सव पर जलन हो रही है।”
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश दीपोत्सव पर सवाल उठा रहे हैं। 2023 में उन्होंने दीये के तेल इकट्ठा करती बच्चों की तस्वीर शेयर कर गरीबी पर तंज कसा था। BJP ने इसे “सांप्रदायिक राजनीति” का हथियार बताया। SP ने सफाई दी कि अखिलेश का बयान “सुझाव मात्र” था, और दीपोत्सव की आलोचना नहीं। SP प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, “अखिलेश जी ने विकास और निरंतरता पर जोर दिया, न कि विरोध पर।”
राजनीतिक विश्लेषको का कहना है कि, “यह बयान 2027 यूपी चुनावों से पहले BJP-SP के बीच ध्रुवीकरण को तेज करेगा। अयोध्या राम मंदिर के बाद BJP का गढ़ है, और अखिलेश का बयान उल्टा पड़ेगा।” दीपोत्सव कल चरम पर पहुंचेगा, जहां 26 लाख दीयों का प्रज्वलन होगा। विवाद के बीच आयोजन जारी है, लेकिन राजनीतिक तापमान चढ़ गया है।
