राजनीति

‘मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा लेकिन सभी 243 सीटों पर प्रचार करूंगा’, मुकेश सहनी का महागठबंधन को झटका

‘मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा लेकिन सभी 243 सीटों पर प्रचार करूंगा’, मुकेश सहनी का महागठबंधन को झटका

दरभंगा: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन में सीट बंटवारे की खींचतान तेज हो गई है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने गुरुवार को दरभंगा में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वे खुद इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए राज्य की सभी 243 सीटों पर जोरदार प्रचार करेंगे। यह बयान सहनी के भाई संतोष सहनी के गौराबौराम विधानसभा क्षेत्र से नामांकन के दौरान दिया गया, जो महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है।

मुकेश सहनी ने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से मैदान में नहीं उतरूंगा, लेकिन वीआईपी के उम्मीदवारों को मजबूत करने के लिए हर सीट पर जाऊंगा। महागठबंधन की सरकार बनी तो उपमुख्यमंत्री का पद मेरा होगा, क्योंकि बिहार के अतिपिछड़ा और निषाद समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।” उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने के ऑफर को भी ठुकरा दिया। सहनी की यह रणनीति ‘एकला चलो रे’ जैसी लग रही है, क्योंकि महागठबंधन ने उन्हें केवल 15-18 सीटें ऑफर की हैं, जबकि वे 60 सीटों की मांग पर अड़े हैं। जुलाई में सहनी ने एक्स पर पोस्ट कर 60 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन अब वे गठबंधन से नाराज नजर आ रहे हैं।

पिछले 2020 चुनाव में वीआईपी ने 11 सीटों पर लड़ीं, जिनमें से 4 पर जीत मिली। सहनी खुद कुढ़नी से विधायक बने, लेकिन उपचुनाव हार गए। अब वे भाई संतोष को उसी सीट से उतार रहे हैं। आरजेडी ने कुछ सीटों पर वीआईपी के सिंबल से अपने उम्मीदवार लड़ाने का फैसला किया है, लेकिन सहनी असंतुष्ट हैं। तेजस्वी यादव से उनकी नाराजगी पुरानी है, खासकर सीट बंटवारे पर। विपक्षी नेता ने कहा, “सीट शेयरिंग में देरी से हमारी तैयारी प्रभावित हो रही है, लेकिन हम मजबूत रहेंगे।”

एनडीए ने अपना सीट बंटवारा पूरा कर लिया है—जेडीयू और बीजेपी को 101-101, एलजेपी (आर) को 29 सीटें। वहीं, महागठबंधन में भाकपा (माले) ने देरी को गठबंधन विस्तार का परिणाम बताया। सहनी का यह ऐलान गठबंधन को कमजोर कर सकता है, खासकर निषाद और अतिपिछड़ा वोट बैंक में। पहले चरण का नामांकन 17 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है, जहां गौराबौराम जैसे क्षेत्रों में हलचल तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि सहनी एनडीए की ओर झुक सकते हैं, लेकिन उन्होंने फिलहाल महागठबंधन में रहने का संकेत दिया। चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे, जहां वोटरों का फैसला तय करेगा कि सहनी का दांव सफल होता है या नहीं।

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