बिहार चुनाव: AIMIM उम्मीदवार के नामांकन में बिरयानी पर मची भगदड़, वीडियो वायरल
बिहार चुनाव: AIMIM उम्मीदवार के नामांकन में बिरयानी पर मची भगदड़, वीडियो वायरल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन के दौर में एक ऐसी घटना घटी, जो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रही है। किशनगंज जिले के बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उम्मीदवार तौसीफ आलम के नामांकन कार्यक्रम में समर्थकों के लिए बिरयानी की दावत रखी गई थी। लेकिन जैसे ही बिरयानी वितरण शुरू हुआ, लोगों की भीड़ इतनी उमड़ पड़ी कि भगदड़ मच गई। वीडियो में लोग एक-दूसरे पर चढ़ते नजर आ रहे हैं, धक्का-मुक्की हो रही है और खाने के डिब्बों को छीनने की होड़ लग गई। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे उम्मीदवार की इमेज पर सवाल उठने लगे हैं।
तौसीफ आलम ने गुरुवार को बहादुरगंज में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले उन्होंने ‘फातेहा खानी’ नामक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें हजारों समर्थक जमा हो गए। कार्यक्रम में बिरयानी का वितरण समर्थकों के सम्मान के रूप में किया गया था, लेकिन व्यवस्था की कमी से हालात बेकाबू हो गए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि लोग बिरयानी के डिब्बे हथियाते हुए भाग रहे हैं, जबकि कुछ के बीच हाथापाई भी हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे ‘बिरयानी लूट’ का नाम देते हुए मीम्स बनाना शुरू कर दिया है। एक यूजर ने लिखा, “चुनावी दावतें अब भगदड़ का कारण बन रही हैं!”
उम्मीदवार तौसीफ आलम ने घटना पर सफाई देते हुए कहा, “यह केवल फातेहा खानी का कार्यक्रम था, जिसमें समर्थकों के प्रेम में भीड़ उमड़ आई। बिरयानी का वितरण सम्मान के लिए था, न कि लालच के लिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनके समर्थकों की उत्साह की अभिव्यक्ति है। AIMIM के संस्थापक असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्वीट कर समर्थन जताया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे मजाक उड़ाया। बिहार जनता पार्टी के एक नेता ने कहा, “ऐसी दावतों से वोट नहीं, विवाद मिलता है।”
यह घटना बिहार चुनावी माहौल में हलचल मचा रही है, जहां नामांकन प्रक्रिया दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। बहादुरगंज सीट मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहां AIMIM मजबूत पकड़ रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं उम्मीदवार की छवि को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर जब वोटर जागरूक हो रहे हैं। वीडियो को अब तक लाखों व्यूज मिल चुके हैं, और यह बहस का विषय बन गया है कि क्या चुनावी कार्यक्रमों में भोजन वितरण की सही व्यवस्था जरूरी नहीं। बिहार चुनाव 6 और 11 नवंबर को होंगे, जहां AIMIM जैसे दल अल्पसंख्यक वोट बैंक पर नजर रखे हुए हैं।
