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जेल वारंट से डरकर ‘बेहोश’ हुए BJP नेता, अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पहुंचे सलाखों के पीछे

जेल वारंट से डरकर ‘बेहोश’ हुए BJP नेता, अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पहुंचे सलाखों के पीछे

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज में राजनीतिक ड्रामा ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा के दो प्रमुख नेता—नगर परिषद अध्यक्ष जिनेश कुमार जैन और मंडल अध्यक्ष संजय जैन—डॉक्टर से मारपीट के पुराने मामले में जेल जाने से बचने के लिए ‘बेहोश’ होने का नाटक कर अस्पताल पहुंचे। लेकिन कोर्ट के सख्त रुख के आगे उनकी चालाकी नाकाम रही। बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही दोनों को पुलिस ने कस्टडी में ले जेल भेज दिया। यह घटना स्थानीय स्तर पर सियासी हलचल मचा रही है, जहां विपक्ष इसे ‘भाजपा नेताओं की जेल-फिरौती’ का प्रतीक बता रहा है।

मामला 15 जून 2023 का है, जब दोनों नेता गैरतगंज सिविल अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि डॉक्टर अनीष्ट लाल को शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने का इल्जाम लगा। डॉक्टर ने बताया कि वे मरीजों का इलाज कर रहे थे, तभी नेतागण नाराज होकर गाली-गलौज करने लगे और हाथापाई पर उतर आए। पीड़ित डॉक्टर ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन जांच में देरी हुई। कुछ महीनों बाद गैरतगंज कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। वारंट की खबर सुनते ही दोनों ‘अचानक बेहोश’ हो गए और खुद को रायसेन जिला अस्पताल में भर्ती करवा लिया। अस्पताल रिकॉर्ड्स में उनके लक्षणों को ‘तनावजन्य सदमा’ बताया गया, लेकिन मेडिकल बोर्ड ने फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया।

कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि डिस्चार्ज होते ही जेल भेजा जाए। पुलिस ने अस्पताल के बाहर पहरा बिठा रखा था। डिस्चार्ज के तुरंत बाद दोनों को वाहन में बिठाकर भोपाल सेंट्रल जेल ले जाया गया। जिनेश जैन ने पत्रकारों से कहा, “यह अन्याय है, हम निर्दोष हैं। डॉक्टर ने झूठा केस बनाया।” वहीं, संजय जैन ने चुप्पी साधी। भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा, “पार्टी नेता हैं, जल्द जमानत मिल जाएगी।” लेकिन विपक्षी कांग्रेस ने इसे ‘कानून से ऊपर कोई नहीं’ बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया, “जब वारंट कटता है तो नेताजी बेहोश हो जाते हैं, लेकिन जनता का न्याय कभी सोता नहीं।”

यह घटना मध्य प्रदेश में भाजपा की छवि पर सवाल खड़ी कर रही है, जहां हाल ही में कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के केस चले हैं। डॉक्टर एसोसिएशन ने समर्थन जताते हुए कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले रुकने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह फैसला अन्य मामलों में मिसाल बनेगा। दोनों नेताओं को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, और अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी।

कुल मिलाकर, यह ‘बेहोशी का ड्रामा’ सियासी थिएटर बन गया, जो जेल की सलाखों पर समाप्त हुआ। क्या जमानत मिलेगी या लंबी सजा? आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल, गैरतगंज में स्थानीय भाजपा कार्यालय सन्नाटे में डूबा है।

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