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J-K में हाईवे पर भरभराकर गिरा पहाड़, चपेट में आई कई इमारतें: कोई हताहत नहीं, लेकिन यात्रा प्रभावित

J-K में हाईवे पर भरभराकर गिरा पहाड़, चपेट में आई कई इमारतें: कोई हताहत नहीं, लेकिन यात्रा प्रभावित

उधमपुर। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में रविवार दोपहर को एक बड़ा भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने हाईवे पर हड़कंप मचा दिया। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमरोली क्षेत्र के नरसू बाजार में पहाड़ी से मलबा और पत्थर भरभराकर गिर पड़े, जिसकी चपेट में एक नया होटल भवन और दो दुकानें आ गईं। सौभाग्य से पूर्व चेतावनी के कारण बाजार क्षेत्र की सभी इमारतों को समय रहते खाली करा लिया गया, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ। हालांकि, हाईवे पर यातायात कुछ घंटों के लिए बाधित रहा, और राहत कार्य जारी है। यह घटना पहाड़ी इलाकों में मानसून के बाद भी हो रही भूस्खलनों की श्रृंखला का हिस्सा है, जो यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

घटना दोपहर करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, नरसू बाजार में पहाड़ी की ऊपरी सतह कमजोर होने से अचानक भूस्खलन शुरू हो गया। मलबे की चपेट में आकर एक हाल ही में खुला होटल पूरी तरह ढह गया, जबकि दो पास-पास की दुकानें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। बाजार में अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को भी मामूली नुकसान पहुंचा। डिप्टी कमिश्नर उधमपुर, सक्षम कुमार ने बताया, “स्थानीय लोगों और प्रशासन की सतर्कता से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। हमने सुबह ही संभावित खतरे की आशंका पर नोटिस जारी किया था, जिसके बाद इमारतों को खाली करा लिया गया।” राहत टीमों ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है, और NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है।

यह हाईवे जम्मू-कश्मीर को बाकी भारत से जोड़ने वाली लाइफलाइन है, जो कश्मीर घाटी तक पहुंच प्रदान करता है। भूस्खलन के कारण दोपहर 1 बजे से यातायात रोक दिया गया था, लेकिन शाम तक एक लेन को बहाल कर लिया गया। सैकड़ों वाहन फंस गए, जिन्हें वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया। स्थानीय व्यापारी राकेश शर्मा ने बताया, “हमारा बाजार हाईवे पर स्थित है, जो पर्यटकों का केंद्र है। होटल का नुकसान हमारी आजीविका पर असर डालेगा। सरकार से मुआवजे की मांग है।” प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और सहायता का आश्वासन दिया है। SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की एक टीम को अलर्ट पर रखा गया है।

यह घटना 2025 के मानसून के बाद भी जारी भूस्खलनों की याद दिलाती है। अप्रैल में रामबन जिले में इसी हाईवे पर भारी बारिश से 22 जगहों पर भूस्खलन हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों वाहन मलबे में दब गए। अगस्त में जम्मू-राजौरी हाईवे पर भी इसी तरह का हादसा हुआ, जहां सड़क बहाली में कई दिन लगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण ने पहाड़ियों को कमजोर कर दिया है। चार धाम परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से सड़कें चौड़ी तो हुईं, लेकिन भूस्खलन का खतरा बढ़ गया। IMD (इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट) ने अक्टूबर में भी ऊपरी पहाड़ी इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया था।

राजनीतिक हलकों में इस घटना ने बहस छेड़ दी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, “हर साल यही कहानी। केंद्र और राज्य सरकार को हाईवे की मजबूती पर काम करना चाहिए, वरना कश्मीर अलग-थलग पड़ जाएगा।” वहीं, बीजेपी ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर मुआवजा वितरित किया जाए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि हाईवे के किनारे मजबूत दीवारें और ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए।

यह भूस्खलन न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पर्यटन को भी प्रभावित कर रहा है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर रोज हजारों यात्री गुजरते हैं, और किसी भी बाधा से घाटी की आपूर्ति चेन प्रभावित होती है। प्रशासन ने अपील की है कि यात्री ट्रैफिक अपडेट्स चेक करें और सतर्क रहें। फिलहाल, हाईवे पूरी तरह बहाल हो चुका है, लेकिन मलबा हटाने का काम सोमवार तक चलेगा। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण का संतुलन बनाना कितना जरूरी है।

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