नोबेल शांति पुरस्कार 2025: ट्रंप को नहीं, वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ मारिया कोरिना मचाडो को मिला सम्मान
नोबेल शांति पुरस्कार 2025: ट्रंप को नहीं, वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ मारिया कोरिना मचाडो को मिला सम्मान
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करते हुए वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को चुना है। वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए उनके अथक संघर्ष को सम्मानित करते हुए कमेटी ने कहा कि मचाडो ने तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण के लिए जोखिम भरा काम किया है। यह पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न मिलने की उम्मीदों को झटका देता है, जिन्होंने इजरायल-हमास युद्धविराम और अन्य समझौतों के दम पर खुद को मजबूत दावेदार बताया था। मचाडो को 10 दिसंबर को ओस्लो में पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जहां 11 मिलियन स्वedish क्रोनर (करीब 1 करोड़ डॉलर) का चेक भी मिलेगा।
नोबेल कमेटी के चेयरमैन जॉरगेन वाटने फ्राइडनेस ने घोषणा के दौरान कहा, “मचाडो शांति की बहादुर और समर्पित चैंपियन हैं, जो बढ़ती अंधेरी में लोकतंत्र की लौ जलाए रखती हैं।” उन्होंने मचाडो को लैटिन अमेरिका में नागरिक साहस का असाधारण उदाहरण बताया। यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के तीन मानदंडों—लोकतंत्र को बढ़ावा, सैन्यीकरण का विरोध और शांतिपूर्ण संक्रमण—पर आधारित है। मचाडो ने प्रतिक्रिया में कहा, “यह पुरस्कार वेनेजुएला के लोगों की जीत है, जो दमन के खिलाफ खड़े हैं। हम लोकतंत्र की ओर बढ़ते रहेंगे।”
मचाडो का संघर्ष: तानाशाही के खिलाफ ‘आयरन लेडी’
मारिया कोरिना मचाडो (56 वर्ष), वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता, को ‘आयरन लेडी’ के नाम से जाना जाता है। निकोलस मादुरो की तानाशाही के खिलाफ उन्होंने 2002 से सक्रिय संघर्ष किया है। 2010 में वे राष्ट्रीय सभा के लिए रिकॉर्ड वोटों से चुनी गईं, लेकिन 2014 में मादुरो शासन ने उन्हें पद से हटा दिया। मचाडो ने वेंते वेनेजुएला पार्टी की स्थापना की और 2017 में सोय वेनेजुएला गठबंधन बनाया, जो राजनीतिक विभाजनों को पार कर लोकतंत्र के लिए एकजुट हुआ। जुलाई 2024 के विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने 70% से ज्यादा वोट हासिल किए, लेकिन मादुरो ने धांधली का आरोप लगाकर सत्ता कायम रखी। इसके बाद मचाडो पर गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, और वे महीनों तक भूमिगत रहीं। जनवरी 2025 में काराकास में रैली के दौरान उनकी गिरफ्तारी का प्रयास विफल रहा।
उनके प्रयासों से वेनेजुएला में मानवाधिकार उल्लंघनों पर वैश्विक ध्यान गया, और लाखों लोग सड़कों पर उतरे। 2024 में उन्होंने एडमुंडो गोंजालेज के साथ सखारोव पुरस्कार जीता, और 2019 में लिबरल इंटरनेशनल का फ्रीडम अवॉर्ड मिला। टाइम मैगजीन ने 2025 में उन्हें दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में शामिल किया।
ट्रंप की उम्मीदों पर पानी
ट्रंप ने गाजा युद्धविराम, इजरायल-हमास डील और अन्य मध्य पूर्व समझौतों के आधार पर नोबेल की जोरदार लॉबिंग की थी। पाकिस्तान, इजरायल के पीएम नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने उनका समर्थन किया। क्रिप्टो बेटिंग साइट्स पर ट्रंप की संभावना 4% तक गिर गई थी, जबकि मचाडो की 67% थी। नोबेल कमेटी ने स्पष्ट किया कि पुरस्कार उन प्रयासों को जाता है जो शांति को स्थायी बनाते हैं, न कि अस्थायी डील्स को।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
– वेनेजुएला: विपक्ष ने जश्न मनाया, लेकिन मादुरो शासन ने इसे ‘साजिश’ बताया।
– अमेरिका: सीनेटर मार्को रुबियो ने बधाई दी, जो मचाडो के नामांकन के समर्थक थे।
– भारत: विदेश मंत्रालय ने लोकतंत्र के संघर्ष को सराहा, और मानवाधिकार संगठनों ने इसे प्रेरणा बताया।
– अन्य: यूएनएचसीआर और रेड क्रॉस जैसे पुरस्कार विजेताओं ने मचाडो की तुलना ऐतिहासिक शांति कार्यकर्ताओं से की।
यह पुरस्कार वैश्विक लोकतंत्र के पतन के बीच एक संदेश है, जहां 2025 में 338 नामांकनों में से मचाडो चुनी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वेनेजुएला में शांतिपूर्ण बदलाव को गति देगा। अधिक जानकारी के लिए nobelprize.org पर देखें।
