उत्तराखंड पर मंडराया भूकंप का खतरा: भूगर्भ में जमा हो रही विनाशकारी ऊर्जा, वाडिया वैज्ञानिकों की चेतावनी
हिमालयी क्षेत्र में भूकंप का खतरा बढ़ता जा रहा है, और उत्तराखंड सबसे संवेदनशील राज्यों में शुमार है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wadia Institute of Himalayan Geology) के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि राज्य के भूगर्भ में भारी मात्रा में भूकंपीय ऊर्जा जमा हो रही है, जो किसी भी समय 7.0 या इससे अधिक तीव्रता के विनाशकारी भूकंप का कारण बन सकती है। मध्य हिमालय क्षेत्र, जिसमें उत्तराखंड का कुमाऊं और गढ़वाल शामिल हैं, “लॉकिंग जोन” की स्थिति में है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों का घर्षण ऊर्जा को दबाव में रख रहा है। यह चेतावनी हाल की कार्यशालाओं और जीपीएस डेटा के विश्लेषण पर आधारित है।
वैज्ञानिकों का अनुमान: ऊर्जा जमा क्यों हो रही है?
वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक विनीत गहलोत ने बताया कि हिमालय क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच घर्षण से ऊर्जा संचित हो रही है। “पिछले 300-400 वर्षों से उत्तराखंड में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, जिससे ऊर्जा का दबाव बढ़ गया है। यह लॉकिंग जोन (250 किलोमीटर क्षेत्र) में सिकुड़न की स्थिति पैदा कर रहा है, जहां सामान्य गति 40 मिमी प्रति वर्ष के बजाय सिर्फ 14-20 मिमी है।” गहलोत ने कहा कि इससे 7-8 रिक्टर स्केल का भूकंप संभव है, जो दिल्ली तक प्रभावित कर सकता है।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने हालिया कार्यशाला “अंडरस्टैंडिंग हिमालयन अर्थक्वेक्स एंड अर्थक्वेक रिस्क असेसमेंट” में कहा कि छोटे झटके (जैसे 2024 में 59 भूकंप) बड़ी तबाही की “आहट” हैं। नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, कपकोट, धारचूला और मुनस्यारी जैसे क्षेत्र जोन 4 और 5 में आते हैं, जहां खतरा सबसे अधिक है। तिब्बत में जनवरी 2025 के 7.1 तीव्रता वाले भूकंप से भी ऊर्जा का कुछ हिस्सा रिलीज हुआ, लेकिन उत्तराखंड का खतरा कम नहीं हुआ।
हिमालयी क्षेत्र में भूकंप का इतिहास
उत्तराखंड में ऐतिहासिक रूप से बड़े भूकंप आए हैं:
– 1344 और 1505: हरिद्वार के लालगढ़ के पास 8.0 तीव्रता के भूकंप, जिनसे व्यापक तबाही हुई।
– 1991 उत्तरकाशी भूकंप: 6.8 तीव्रता, 142 झटके 2 महीनों में; हजारों घर क्षतिग्रस्त।
– 2024 में: 59 छोटे भूकंप, ज्यादातर उत्तरकाशी और गढ़वाल में।
वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल (2015, 7.8 तीव्रता) जैसी स्थिति उत्तराखंड में दोहराई जा सकती है, जहां ऊर्जा रिलीज से भूस्खलन और बाढ़ जैसी द्वितीयक आपदाएं बढ़ेंगी।
राज्य सरकार की तैयारी: सेंसर बढ़ाए, जागरूकता अभियान
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग ने 20 स्थानों पर भूकंपमापी यंत्र लगाए हैं, और 15 और सेंसर जल्द इंस्टॉल होंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “वाडिया इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर रिस्क असेसमेंट तेज करेंगे। भवन निर्माण में भूकंप-रोधी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेंगे।” विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसमें “ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन” जैसी ट्रेनिंग दी जा रही है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर निर्माण करें। वाडिया इंस्टीट्यूट के डॉ. कालाचंद साईं ने कहा, “भूकंप कब आएगा, इसका सटीक अनुमान मुश्किल है, लेकिन तैयारी से नुकसान कम किया जा सकता है।”
यह चेतावनी राज्यवासियों को सतर्क रहने का संदेश देती है। भूकंपरोधी भवनों का निर्माण और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत है।
