उत्तराखंड

कोटद्वार के लाल शहीद सूरज सिंह नेगी को नम आंखों से अंतिम विदाई, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

कोटद्वार के लाल शहीद सूरज सिंह नेगी को नम आंखों से अंतिम विदाई, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में शनिवार देर रात उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब जम्मू-कश्मीर के बारामूला सेक्टर से दुखद समाचार आया। भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में तैनात राइफलमैन सूरज सिंह नेगी (25 वर्ष) ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों के साथ क्रॉस फायरिंग में गोली लगने से शहीद हो गए। उनके पार्थिव शरीर को विशेष सैन्य विमान से देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे लाया गया, जहां से सेना के वाहन द्वारा कोटद्वार के लालपुर गांव पहुंचाया गया। रविवार को खो नदी के तट पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हजारों लोगों की नम आंखों ने अपने वीर सपूत को ‘भारत माता की जय’ और ‘सूरज सिंह अमर रहें’ के नारों के साथ अंतिम विदाई दी।

सूरज सिंह नेगी, कोटद्वार के लालपुर गांव के निवासी, 2021 में गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। बचपन से ही देशसेवा का जज्बा लिए सूरज ने अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से सभी का दिल जीता। 3 अक्टूबर को बारामूला के सीमावर्ती क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सैन्य अस्पताल में इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। उनके शहीद होने की खबर ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। सूरज के परिवार में माता-पिता और एक छोटा भाई हैं, जो स्वयं सेना में सेवारत है। हाल ही में छुट्टी पर घर आए सूरज कुछ दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे।

शनिवार देर रात तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर लालपुर पहुंचा। शोभायात्रा में सेना के जवान और हजारों ग्रामीण शामिल हुए। अंतिम संस्कार से पहले सेना की टुकड़ी ने गन सैल्यूट देकर सूरज को सलामी दी। उनके पिता ने मुखाग्नि दी। एक ग्रामीण ने कहा, “सूरज बचपन से देशभक्त था। उसका बलिदान हमें गर्व देता है, पर दुख असहनीय है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए एक्स पर लिखा, “जम्मू-कश्मीर के बारामूला में मां भारती की रक्षा करते हुए कोटद्वार के वीर सपूत राइफलमैन सूरज सिंह नेगी की शहादत पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनका बलिदान हमें हमेशा प्रेरित करेगा। राज्य सरकार परिवार के साथ है।” उन्होंने परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, नौकरी और अन्य सहायता का ऐलान किया।

सूरज की शहादत ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को फिर से उजागर किया। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि सूरज हमेशा सेना में जाने का सपना देखता था। उसकी वीरता की कहानियां गढ़वाल के युवाओं को प्रेरित करेंगी। यह घटना एक बार फिर सैनिकों और उनके परिवारों की कुर्बानी को रेखांकित करती है, जो देश की सुरक्षा के लिए अनमोल है।

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