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छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 10 मासूमों की मौत के बाद डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, बड़ी कार्रवाई शुरू

छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: 10 मासूमों की मौत के बाद डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, बड़ी कार्रवाई शुरू

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में जहरीले कफ सिरप से 10 मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। खांसी-जुकाम के इलाज के लिए दी गई ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप में घातक रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मिलावट पाई गई, जिसने बच्चों की किडनी को फेल कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सिरप लिखने वाले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को शनिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। साथ ही, सिरप बनाने वाली तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

परासिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर परासिया थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 0.1 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक, लगभग 48.6 प्रतिशत थी। यह रसायन, जो आमतौर पर कूलेंट और सॉल्वेंट में इस्तेमाल होता है, बच्चों के लिए बेहद जहरीला साबित हुआ। डॉ. सोनी, जो सरकारी डॉक्टर होने के साथ-साथ प्राइवेट क्लीनिक भी चलाते थे, ने मरने वाले अधिकांश बच्चों को यही सिरप लिखा था। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि डॉक्टर ने सस्ते दामों पर उपलब्ध इस सिरप को बिना गुणवत्ता जांचे प्रिस्क्राइब किया, जिसकी चपेट में 2-8 वर्ष के बच्चे फंस गए।

घटना की शुरुआत 24 अगस्त से हुई, जब परासिया के ग्रामीण इलाकों में बच्चों को खांसी-बुखार की शिकायत हुई। 7 सितंबर को पहली मौत के बाद एक-एक कर 10 बच्चे किडनी फेलियर से दम तोड़ चुके हैं। नागपुर के अस्पतालों में भर्ती कुछ बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे की रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि मौत का कारण न तो पानी, न ही वेक्टर-जनित बीमारी, बल्कि मिलावटी सिरप ही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘मानव-निर्मित त्रासदी’ बताते हुए तत्काल प्रभाव से पूरे मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप की बिक्री पर बैन लगा दिया। उन्होंने प्रत्येक मृतक परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का ऐलान किया। तमिलनाडु, केरल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी इस सिरप पर प्रतिबंध लगा है। राजस्थान में इसी सिरप से दो बच्चों की मौत के बाद ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया गया।

इस घटना ने दवा उद्योग की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिरप में गैर-कानूनी सॉल्वेंट का इस्तेमाल गुणवत्ता नियंत्रण की कमी को दर्शाता है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना ससादा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुआवजे को ‘नाकाफी’ बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। स्थानीय स्तर पर अभिभावक आक्रोशित हैं। एक मां ने रोते हुए कहा, “हमने डॉक्टर पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने जहर थमा दिया।”

पुलिस अब डॉ. सोनी से पूछताछ कर रही है। कंपनी के संचालकों की तलाश जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी के आदेश दिए हैं। यह मामला दवा नियमन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दे रहा है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

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