उत्तराखंड

उत्तराखंड पेपर लीक: CBI जांच के आश्वासन के बावजूद धरना समाप्त, कांग्रेस ने CM आवास कूच कर सरकार को घेरा – पुलिस ने बैरिकेडिंग से रोका, झड़पें हुईं

उत्तराखंड पेपर लीक: CBI जांच के आश्वासन के बावजूद धरना समाप्त, कांग्रेस ने CM आवास कूच कर सरकार को घेरा – पुलिस ने बैरिकेडिंग से रोका, झड़पें हुईं

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्रेजुएट लेवल परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के खिलाफ छात्रों का धरना भले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के CBI जांच के आश्वासन के बाद 10 अक्टूबर तक स्थगित हो गया हो, लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का सिलसिला जारी रखा है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून में CM आवास की ओर जोरदार कूच किया, लेकिन भारी पुलिस बल ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई, जिसमें हल्की धक्कामुक्की और नारेबाजी देखने को मिली।

कांग्रेस का प्रदर्शन UKSSSC की 21 सितंबर को हुई परीक्षा के दौरान कथित लीक के खिलाफ था, जहां हरिद्वार सेंटर से तीन पेजों का पेपर परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट बाद ही वायरल हो गया था। छात्र संगठनों ने परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग की थी। 29 सितंबर को CM धामी ने परेड ग्राउंड पर छात्रों से मुलाकात कर भावुक अपील की और CBI जांच की सिफारिश का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना 10 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया। लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘आधा-अधूरा वादा’ बताते हुए कहा कि न तो UKSSSC चेयरमैन हटाए गए हैं, न परीक्षा रद्द हुई है। पार्टी ने CM आवास कूच का ऐलान किया था।

शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता विधानसभा से CM आवास की ओर बढ़े। नारों से गूंजती सड़कों पर ‘पेपर चोर, गद्दी छोड़’, ‘धामी हाय-हाय’ और ‘CBI जांच हो, परीक्षा रद्द हो’ के जयकारे लग रहे थे। कार्यकर्ताओं ने सरकार पर ‘नकल माफिया’ को संरक्षण देने का आरोप लगाया। लेकिन CM आवास से 500 मीटर पहले पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाई थी। SSP कमलकांत ध्यानी के नेतृत्व में 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। जब कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने उन्हें धक्के देकर पीछे हटाया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पानी की बोतलें और पोस्टर फेंके, जबकि पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज का सहारा लिया। करन माहरा ने कहा, “धामी सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। CBI सिफारिश सिर्फ दिखावा है, असल में माफिया बचाने की कोशिश है।”

पुलिस ने प्रदर्शन को ‘अनधिकृत’ बताते हुए 20 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कोई गंभीर चोट नहीं लगी, लेकिन तनाव का माहौल रहा। कांग्रेस महासचिव संगठन हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा, “धामी जी का आश्वासन खोखला साबित हो रहा है। युवा सड़कों पर हैं, सरकार बैरिकेड्स के पीछे छिपी है।”

सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन सूत्रों के अनुसार CBI को सिफारिश भेज दी गई है। पूर्व में CM धामी ने इसे ‘नकल जिहाद’ करार दिया था और SIT गठित की थी, जिसमें दो आरोपी – खालिद मलिक और उनकी बहन सबिया – गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन विपक्ष का कहना है कि ‘कोचिंग माफिया’ और BJP नेताओं का गठजोड़ उजागर होना बाकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी पंचायत चुनावों को प्रभावित कर सकता है, जहां युवा वोटर निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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