पटना में रावण का टूटा सिर, दहन से पहले ही दशानन का ये हाल; गांधी मैदान में खड़ा था पुतला
विजयादशमी के पावन पर्व पर बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रावण दहन का उत्साह चरम पर था, लेकिन सुबह से हो रही तेज बारिश ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले का सिर दहन से पहले ही टूटकर लटक गया, जबकि मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों को भी भारी नुकसान पहुंचा। बारिश के कारण मैदान में पानी भर गया और हजारों दर्शक भीगते हुए इधर-उधर भागे। आयोजकों को अब इमरजेंसी मरम्मत करनी पड़ रही है, ताकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शाम 5 बजे ‘लंका दहन’ कर सकें।
यह पटना का सबसे बड़ा रावण दहन कार्यक्रम है, जहां हर साल पूरे बिहार से लाखों लोग जुटते हैं। इस बार आगरा के 15 कारीगरों ने राजस्थानी और दक्षिण भारतीय शैली में 80 फीट का रावण, 75 फीट का मेघनाद और 70 फीट का कुंभकरण तैयार किया था। पुतले वॉटरप्रूफ होने का दावा किया गया था, लेकिन सुबह 10 बजे शुरू हुई झमाझम बारिश ने कागज-बांस से बने ढांचे को गलाना शुरू कर दिया। तेज हवाओं के साथ पानी भरने से पुतले भारी हो गए, और रावण का सिर टूटकर नीचे लटक गया। आयोजक समिति के अध्यक्ष कमल नोपानी ने बताया, “पुतले इको-फ्रेंडली हैं, लेकिन अप्रत्याशित बारिश ने चुनौती पैदा कर दी। हम क्रेन और मजदूरों से मरम्मत कर रहे हैं। 5 लाख रुपये के पटाखों से रिमोट कंट्रोल दहन होगा, लेकिन देरी हो सकती है।”
बारिश का असर केवल पुतलों तक सीमित नहीं रहा। गांधी मैदान में जुटे दर्शकों को छाते और रेनकोट के बावजूद भिगना पड़ा। कई परिवार बच्चों के साथ लौट गए, जबकि कुछ उत्साही लोग मैदान के बाहर इंतजार करते नजर आए। पटना पुलिस ने 49 स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किया है, और 7 गेटों (4,5,6,7,8,10,12) से प्रवेश की व्यवस्था की है। ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू है, लेकिन बारिश से सड़कें फिसलन भरी हो गईं। मौसम विभाग ने पूरे बिहार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे सुपौल जैसे अन्य जिलों में भी कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में रावण का टूटा सिर और भीगे पुतले साफ नजर आ रहे हैं। जहां लोग मजाक उड़ा रहे हैं कि “रावण को राम ने नहीं, बारिश ने हरा दिया।” विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “प्रशासन की तैयारी फेल, दशहरा भीग गया।” वहीं, आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम शाम तक सुचारू रूप से चलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे पर्व प्रभावित हो रहे हैं, और भविष्य में वॉटरप्रूफ तकनीक पर जोर देना होगा।
फिलहाल, मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा है, और उम्मीद है कि बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश फिर से गूंजेगा। लेकिन आज का दशहरा बारिश की यादों के साथ ही रहेगा।
