ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला सिख जत्था जाएगा पाकिस्तान: सरकार ने दी मंजूरी
भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी घटनाओं से चरम पर पहुंचे तनाव के बावजूद केंद्र सरकार ने गुरु नानक देव जी के 555वें प्रकाश पर्व पर सिख श्रद्धालुओं के जत्थे को पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को सम्मान देते हुए लिया गया है, लेकिन सख्त सुरक्षा शर्तों के साथ। जत्था 5 नवंबर को ननकाना साहिब और करतारपुर साहिब जैसे पवित्र स्थलों पर पहुंचेगा, जहां प्रकाशोत्सव की रौनक देखने को मिलेगी।
गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार को यह आधिकारिक घोषणा की, जो सितंबर में जारी एडवाइजरी के उलट है। उस समय MHA ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जत्थे की यात्रा पर रोक लगा दी थी, जिसकी पंजाब में भारी आलोचना हुई थी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सुखबीर सिंह बादल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने केंद्र से पुनर्विचार की मांग की थी। बादल ने ट्वीट कर गृह मंत्री अमित शाह से अपील की थी, “प्रकाश पर्व जैसे पवित्र अवसर पर सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं।” SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने भी कहा था, “यह परंपरा दशकों पुरानी है, इसे तोड़ना सिख एकता के लिए खतरा है।”
केंद्र के इस यू-टर्न के पीछे कूटनीतिक दबाव और धार्मिक संवेदनशीलता मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यात्रा केवल स्वीकृत जत्थे के रूप में ही होगी। यात्रियों की सूची यात्रा से 10 दिन पहले पाकिस्तान को भेजी जाएगी, और वीजा केवल MEA की सिफारिश पर जारी होगा। अकेले यात्रा की अनुमति नहीं होगी—सभी को ICP अटारी बॉर्डर से जत्थे के हिस्से के रूप में जाना पड़ेगा। करतारपुर कॉरिडोर अभी बंद है, इसलिए पारंपरिक रूट से ही यात्रा होगी। सुरक्षा के लिहाज से जत्थे की संख्या सीमित रखी गई है, और हर सदस्य की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य है।
यह यात्रा 1947 के विभाजन के बाद की परंपरा का हिस्सा है, जब सिख श्रद्धालु पाकिस्तान के गुरुद्वारों में जाकर आस्था का समागम करते हैं। ननकाना साहिब, गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान, और करतारपुर साहिब, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली, इस यात्रा के मुख्य केंद्र होंगे। SGPC के अनुसार, जत्थे में 500 से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे, जो अमृतसर से ट्रेन या बस द्वारा बॉर्डर पार करेंगे। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) ने भी स्वागत की पुष्टि की है।
हालांकि, विपक्ष ने केंद्र की ‘दोहरी नीति’ पर सवाल उठाए हैं। AAP और कांग्रेस ने कहा कि क्रिकेट मैचों को मंजूरी देने वाले केंद्र ने पहले धार्मिक यात्रा रोकी, अब अनुमति दी—यह राजनीतिक दबाव का नतीजा है। BJP ने पलटवार किया, “सुरक्षा पहले, लेकिन आस्था का सम्मान भी जरूरी।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-पाक संबंधों में छोटी सी सकारात्मक सौगात है, जो तनाव कम करने की दिशा में कदम हो सकता है।
SGPC ने श्रद्धालुओं से आवेदन करने को कहा है, ताकि यात्रा सुचारू हो सके।
