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जुमे की नमाज को देखते हुए बरेली में 48 घंटे इंटरनेट बंद, गृहसचिव ने जारी किया आदेश

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन ने गुरुवार दोपहर 3 बजे से अगले 48 घंटों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। यह कदम आगामी शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में ‘आई लव मुहम्मद’ कैंपेन से जुड़े विवाद के बाद हुई हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के अनुसार, इंटरनेट शटडाउन सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। यह निलंबन मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड और अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर प्रभावी होगा, लेकिन आवश्यक सेवाओं जैसे बैंकिंग और स्वास्थ्य से जुड़े इंटरनेट को छूट दी जा सकती है। प्रशासन ने सभी धार्मिक स्थलों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया है, जबकि पड़ोसी जिलों जैसे बरेली, बाराबंकी और मऊ में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है।

यह फैसला सितंबर माह की हिंसा की पृष्ठभूमि में आया है, जब 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद ‘आई लव मुहम्मद’ कैंपेन के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई थीं। इस घटना में पथराव, वाहनों में आगजनी और पुलिस पर हमले की खबरें आईं थीं। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान सहित 39 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में फतेहगढ़ जेल स्थानांतरित कर दिया गया। विशेष जांच टीम (SIT) को 10 दिनों का समय दिया गया है, जबकि 10 FIR दर्ज हो चुकी हैं।

अलाहजरत परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि मुसलमानों पर सामूहिक दंड लगाया जा रहा है। परिवार के सदस्य तौसीफ रजा ने आरोप लगाया कि मस्जिदों पर छापेमारी, इमामों को परेशान करना और नमाज अदा करने से रोकना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि “अत्याचार” जारी रहे तो “ठोस कदम” उठाए जाएंगे।

प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। डीआईजी अजय कुमार सहनी ने इसे “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया है। बरेली में फ्लैग मार्च, हाउस-टू-हाउस सर्च और ड्रोन निगरानी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंटरनेट ब्लैकआउट भारत में बढ़ते डिजिटल प्रतिबंधों का एक और उदाहरण है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है।

फिलहाल, शहर में दुकानें बंद हैं और यातायात प्रभावित है।

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