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‘मैं चुटकुले सुनाती तो मुझे भी मरवा देते’: फेमस अमेरिकी कॉमेडियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस पर लगाए गंभीर आरोप, कॉमेडी फेस्टिवल पर छिड़ा विवाद

‘मैं चुटकुले सुनाती तो मुझे भी मरवा देते’: फेमस अमेरिकी कॉमेडियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस पर लगाए गंभीर आरोप, कॉमेडी फेस्टिवल पर छिड़ा विवाद

सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) की महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ पहल के तहत आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े कॉमेडी फेस्टिवल पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और हास्य कलाकारों का भारी विरोध शुरू हो गया है। अमेरिकी स्टैंडअप कॉमेडियन मिशेल वुल्फ ने इस इवेंट में परफॉर्म करने से साफ इनकार कर दिया है और सऊदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मैं चुटकुले सुनाती तो मुझे भी मरवा देते।” वुल्फ का यह बयान जामाल खशोगी हत्याकांड के बाद सऊदी की छवि सुधारने की कोशिशों पर तीखा प्रहार माना जा रहा है।

रियाद सीजन के हिस्से के रूप में होने वाले इस ‘ग्लोबल कॉमेडी फेस्टिवल’ को आयोजकों ने ‘दुनिया का सबसे बड़ा हास्य उत्सव’ करार दिया है, जिसमें हॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन जैसे डेव शैपेल, केविन हार्ट, बिल बर, पीट डेविडसन, लुईस सी.के. और टॉम सेगुरा जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन कई कलाकारों ने सऊदी के खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया। मिशेल वुल्फ, जो ‘द डेली शो’ में अपनी तीखी राजनीतिक व्यंग्य के लिए जानी जाती हैं, ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “सऊदी अरब जैसे देश में जाकर चुटकुले सुनाना मेरे लिए आत्महत्या के समान होगा। वहां की सरकार विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।”

वुल्फ ने अपने बयान में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने 2018 में स्टंबल में सऊदी पत्रकार जामाल खशोगी की क्रूर हत्या का जिक्र किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने एमबीएस के आदेश पर अंजाम दिया गया बताते हुए सऊदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। “खशोगी जैसे पत्रकार को चुप कराने के लिए हत्या कर दी गई, तो एक महिला कॉमेडियन जो सत्ता पर सवाल उठाएगी, उसका क्या होगा? मैं तो बस चुटकुले सुनाती हूं, लेकिन वहां वो भी खतरे की घंटी बन जाएंगे,” वुल्फ ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा।

सऊदी सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि फेस्टिवल ‘विजन 2030’ का हिस्सा है, जो देश को रूढ़िवादी इस्लामिक छवि से बाहर निकालने और पर्यटन व मनोरंजन को बढ़ावा देने का प्रयास है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, “हम दुनिया भर के कलाकारों का स्वागत करते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा दे रहे हैं। पुराने आरोपों को दोहराना अनुचित है।” हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने फेस्टिवल का बहिष्कार करने की अपील की है। इन संगठनों का कहना है कि सऊदी में महिलाओं, एलजीबीटीक्यू+ समुदाय और राजनीतिक विपक्ष पर अत्याचार जारी हैं, और ऐसे इवेंट ‘स्पोर्टस्वाशिंग’ (खेलों या मनोरंजन के जरिए छवि धोना) का एक और उदाहरण हैं।

मिशेल वुल्फ के अलावा, ब्रिटिश कॉमेडियन जेमी किलस्टीन ने भी ट्वीट कर कहा, “सऊदी में हंसना जोखिम भरा है। वहां हंसी के बजाय सेंसरशिप ज्यादा चलती है।” यह विवाद तब और तेज हो गया जब कुछ भाग लेने वाले कॉमेडियनों पर ‘पैसे के लालच’ का आरोप लगा। केविन हार्ट जैसे सितारों ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन हॉलीवुड में बहस छिड़ गई है कि क्या कलाकारों को ऐसे देशों में जाना चाहिए जहां अभिव्यक्ति की आजादी सीमित है।

फेस्टिवल 15 अक्टूबर से रियाद के किंग फहद इंटरनेशनल स्टेडियम में शुरू होने वाला है, लेकिन विरोध के स्वर तेज होने से इसके रद्द होने की संभावना भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सऊदी की आधुनिकीकरण की कोशिशों को झटका दे सकती है। फिलहाल, मिशेल वुल्फ का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

(यह रिपोर्ट विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया स्रोतों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।)

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