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दिल्ली से दुबई तक चैतन्यानंद का काला नेटवर्क: शेखों से सांठगांठ और छात्राओं का शोषण

स्वयंभू बाबा स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती (उर्फ पार्थ सारथी) का काला कारोबार दिल्ली से दुबई तक फैला हुआ था। दिल्ली के श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट (वसंत कुंज) में छात्राओं का शोषण करने वाले इस 62 वर्षीय फर्जी संत की गिरफ्तारी के बाद व्हाट्सएप चैट्स ने उसके नेटवर्क का काला चेहरा उजागर कर दिया। आगरा से गिरफ्तार चैतन्यानंद पर 17 छात्राओं ने यौन शोषण, ब्लैकमेल और ट्रैफिकिंग के आरोप लगाए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि वह दुबई के अमीर शेखों से ‘दोस्ती’ का दावा कर छात्राओं को ‘डील’ करता था, जो उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था।

चैतन्यानंद का नेटवर्क मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट पर आधारित था, जहां वह पूर्व डायरेक्टर था। वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की छात्राओं को स्कॉलरशिप देकर फंसाता, फिर रात के समय कमरे में बुलाकर शोषण करता। दो महिला सहयोगी—जिन्हें गिरफ्तार किया गया—उसे ‘टॉर्चर रूम’ और सीसीटीवी लोकेशन में मदद करती थीं। लेकिन उसका जाल दुबई तक फैला था। व्हाट्सएप चैट्स में वह एक छात्रा से कहता है: “वन दुबई शेख वांट्स टू हैव ए सेक्स पार्टनर, डू यू हैव एनी नाइस फ्रेंड?” छात्रा ने मना किया तो वह जिद करता रहा, “हाउ इट्स पॉसिबल? योर एनी क्लासमेट? जूनियर?” यह चैट ट्रैफिकिंग का स्पष्ट सबूत है, जहां वह अमीर शेखों को ‘सप्लाई’ के बदले पैसे कमाता था।

पुलिस को उसके फोन से 100 से ज्यादा छात्राओं की अश्लील फोटो मिलीं, जो वह गुप्त रूप से क्लिक करता था. वह छात्राओं को ‘स्वीटी बेबी डॉटर डॉल’ जैसे शब्दों से लुभाता, दिन-रात मैसेज बमबारी करता। एक चैट में वह एक छात्रा को ‘हगिंग पिक्चर’ भेजने को कहता, जिसके लिए ऑनलाइन पेमेंट हुआ था। नेटवर्क का विस्तार अल्मोड़ा और ऋषिकेश तक था, जहां वह पीड़ितों को ले जाता। वह खुद को ‘यूएन इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल का परमानेंट एंबेसडर’ और ‘ब्रिक्स स्पेशल एन्वॉय’ बताता, फर्जी विजिटिंग कार्ड्स से प्रभावित करता। दो पासपोर्ट—एक ‘स्वामी पार्थ सारथी’ और दूसरा ‘स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती’—के नाम से मिले, जो जन्मस्थान और माता-पिता के विवरण में विरोधाभासी थे।

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को चैतन्यानंद को इंस्टीट्यूट ले जाकर ‘टॉर्चर रूम’ की लोकेशन चेक की। वह पकड़े जाने पर बोला, “मैं अछूत हूं, चीफ जस्टिस को कॉल करूंगा।” एक IAF अधिकारी के पत्र से केस की शुरुआत हुई, जब छात्राओं ने शिकायत की। तीन बहनों को ‘डर्टी मैनेजर’ बनाने की कोशिश भी चैट्स में उजागर हुई।

यह मामला महिलाओं के शोषण के खिलाफ सतर्कता का संदेश देता है। कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी दी है। जांच में और खुलासे हो सकते हैं।

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