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RSS फाउंडर हेडगेवार को भारत रत्न देने की मांग: BJP अल्पसंख्यक मोर्चा ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

RSS फाउंडर हेडगेवार को भारत रत्न देने की मांग: BJP अल्पसंख्यक मोर्चा ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भारत रत्न प्रदान करने की मांग तेज हो गई है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर हेडगेवार को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजने का अनुरोध किया है। यह मांग RSS के शताब्दी वर्ष के आगमन के ठीक पहले आई है, जब 2 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में संगठन का शताब्दी समारोह आयोजित हो रहा है।

पत्र में सिद्दीकी ने हेडगेवार को स्वतंत्रता संग्राम के नायक और राष्ट्र-निर्माता के रूप में वर्णित किया। उन्होंने लिखा, “डॉ. हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को हुआ था। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रवाद के प्रतीक बने। उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए, अनुशीलन समिति से जुड़े और बाल गंगाधर तिलक, विनायक दामोदर सावरकर जैसे नेताओं से प्रेरित होकर हिंदू एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।” सिद्दीकी ने उल्लेख किया कि 1921 में राजद्रोह के आरोप में जेल गए और 1930 में जंगल सत्याग्रह के दौरान नौ माह की कैद काटी, लेकिन कभी विचलित नहीं हुए। हेडगेवार ने कहा था, ‘भारत भारतीयों का है, हम पूर्ण स्वतंत्रता मांगते हैं।’ 1925 में विजयादशमी के दिन RSS की स्थापना कर उन्होंने सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन की नींव रखी, जो आज लाखों लोगों को राष्ट्रवाद की राह दिखा रहा है।

सिद्दीकी ने तर्क दिया कि हेडगेवार के स्वतंत्रता संग्राम में प्रत्यक्ष योगदान, राष्ट्र-निर्माण में संगठनात्मक कौशल और एकजुट भारतीय समाज की दृष्टि को देखते हुए भारत रत्न देना उचित होगा। “यह सम्मान न केवल उनकी विरासत को मान्यता देगा, बल्कि युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को प्रेरित करेगा।” उन्होंने कहा कि RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो हेडगेवार की दूरदृष्टि का प्रमाण है।

यह मांग RSS के शताब्दी समारोह से जुड़ी है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करेंगे। ‘मन की बात’ में पीएम ने हेडगेवार की यात्रा को ‘अभूतपूर्व और प्रेरणादायक’ बताया। सिद्दीकी ने कहा, “भारत रत्न जैसे सम्मान के लिए हेडगेवार छोटे हैं।” भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का यह कदम पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अल्पसंख्यक समुदायों को राष्ट्रवादी मूल्यों से जोड़ने का प्रयास करता है।

राजनीतिक हलकों में इस मांग को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, हालांकि विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया। RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी हेडगेवार की विरासत पर जोर दिया। राष्ट्रपति भवन से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह घटना RSS के 100 वर्षों के योगदान को रेखांकित करती है। जय हिंद!

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