लखनऊ में ‘चंगाई सभा’ के नाम पर धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश: ‘मायालोक’ सील, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
लखनऊ में ‘चंगाई सभा’ के नाम पर धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश: ‘मायालोक’ सील, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के बख्तौरीखेड़ा गांव में बीते कई वर्षों से चल रहे एक संगठित धर्मांतरण रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। यह मामला ‘चंगाई सभा’ (ईसाई प्रार्थना सभा) की आड़ में हिंदुओं को ईसाई बनाने का है, जहां गरीब और अनुसूचित जाति के लोगों को बीमारियों के इलाज, आर्थिक सहायता और राशन के लालच देकर उनका ब्रेनवॉश किया जाता था। मुख्य आरोपी मलखान उर्फ मैथ्यूज को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके खेत में बने ‘मायालोक’ नामक हॉल (जिसे वह छोटा चर्च बनाकर इस्तेमाल करता था) को सील कर दिया गया।
घटना का विवरण
– कैसे चल रहा था रैकेट? मलखान ने 2016 में खुद ईसाई धर्म अपनाया और अपना नाम मैथ्यूज रख लिया। इसके बाद उसने अपने परिवार के सदस्यों के नाम भी बदल दिए। वह हर बृहस्पतिवार और रविवार को अपने खेत में बने हॉल में ‘यीशु चंगाई सभा’ आयोजित करता था। यहां कम पढ़े-लिखे, गरीब हिंदुओं (खासकर अनुसूचित जाति के) को बुलाया जाता था। लोगों को गठिया, मिर्गी, सांस की बीमारी जैसी समस्याओं से निजात दिलाने का झांसा दिया जाता। सभा में प्रोजेक्टर पर धार्मिक फिल्में दिखाई जातीं, हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया जाता, और बपतिस्मा (ईसाई दीक्षा) देकर उनका धर्मांतरण कराया जाता। धर्मांतरण के बाद आर्थिक मदद का वादा किया जाता, जिससे लोग फंस जाते।
– कितने लोग प्रभावित? विभिन्न रिपोर्ट्स में संख्या अलग-अलग बताई गई है, लेकिन मुख्य आरोपी ने अकेले 500 से अधिक लोगों का धर्मांतरण कराया, जबकि पिछले दो वर्षों में 250 से ज्यादा मामले सामने आए। कुल मिलाकर 50 से सैकड़ों हिंदू प्रभावित हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। यह रैकेट सोशल मीडिया (जैसे ‘यीशु चंगाई सभा’ व्हाट्सएप ग्रुप) के जरिए फैलाया जाता था।
– पुलिस कार्रवाई: बजरंग दल के सदस्य धर्मेंद्र शर्मा की शिकायत पर 28 सितंबर 2025 को निगोहां पुलिस ने छापा मारा। आरोपी के पास से बाइबल, प्रचार सामग्री और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल, एसीपी रजनीश वर्मा और इंस्पेक्टर अनुज तिवारी की टीम ने पांच टीमों के साथ जांच की। अब फंडिंग स्रोत, बैंक खाते और अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। मामला उत्तर प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम (धर्मांतरण विरोधी कानून) के तहत दर्ज किया गया है।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह मामला यूपी में चल रहे बड़े पैमाने पर धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा लगता है। मोहनलालगंज, निगोहां और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दशकों में 1000 से ज्यादा हिंदू ईसाई बने हैं। ऐसे रैकेट अक्सर खेतों या छोटे स्थलों पर सभाएं आयोजित कर चलाए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले साधारण किसान था, लेकिन धर्मांतरण के बाद उसके जीवन स्तर में सुधार हुआ, जो फंडिंग की ओर इशारा करता है।
यह घटना भारत में धर्मांतरण के विवादास्पद मुद्दे को उजागर करती है, जहां प्रलोभन या दबाव के आरोप लगते रहते हैं। यूपी सरकार के सख्त कानून के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो सामाजिक तनाव बढ़ा सकते हैं। जांच पूरी होने पर और खुलासे हो सकते हैं।
