अयोध्या: विजयदशमी पर नहीं जलेगा रावण का 240 फुट ऊंचा विशालकाय पुतला, सुरक्षा कारणों पर प्रशासन ने लगाई रोक; आयोजकों में हड़कंप
अयोध्या: विजयदशमी पर नहीं जलेगा रावण का 240 फुट ऊंचा विशालकाय पुतला, सुरक्षा कारणों पर प्रशासन ने लगाई रोक; आयोजकों में हड़कंप
भगवान राम की नगरी अयोध्या में इस बार विजयदशमी (दशहरा) का उत्सव एक अलग ही रूप में मनाया जाएगा। राम कथा पार्क में आयोजित भव्य रामलीला के क्लाइमैक्स में 240 फुट ऊंचे रावण, 190 फुट ऊंचे मेघनाद और कुंभकर्ण के विशालकाय पुतलों का दहन नहीं होगा। जिला प्रशासन ने सुरक्षा मानकों और अनुमति न मिलने के कारण इस पर रोक लगा दी है। यह फैसला दशहरे से महज तीन दिन पहले आया है, जिससे आयोजकों में निराशा और हड़कंप मच गया है।
अयोध्या के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) देवेश चतुर्वेदी ने बताया, “गश्ती दल द्वारा राम कथा पार्क में इन विशाल पुतलों का निर्माण होते देखा गया, लेकिन आयोजकों ने दहन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। सुरक्षा कारणों से यह रोक लगाई गई है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन पारंपरिक रामलीला से इतर है, और दशहरा-दुर्गा पूजा के दौरान बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल पारंपरिक स्थलों पर ही कार्यक्रमों की अनुमति दी जा रही है।
पुतलों का निर्माण: एक महीने की मेहनत पर पानी
फिल्म कलाकार रामलीला समिति द्वारा आयोजित इस रामलीला में बॉलीवुड सितारे जैसे मनोज तिवारी, रवि किशन, बिंदू दारा सिंह, अवतार गिल और मिस यूनिवर्स इंडिया मणिका शिर्के भी किरदार निभा रहे हैं। 22 सितंबर से शुरू हुई इस रामलीला के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए कारीगरों ने पिछले एक महीने से दिन-रात एक कर इन पुतलों का निर्माण किया था। रावण का पुतला कुतुब मीनार (73 मीटर) से भी ऊंचा है, जो देखने वालों को हैरान कर रहा था। लेकिन अब ये पुतले दहन के बिना ही रह जाएंगे।
समिति के सदस्य सुभाष चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि 28 सितंबर की रात पुलिस ने कलाकारों को बुलाकर अग्नि-संबंधी कोई कार्य न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा, “मोदी-योगी राज में भी रावण दहन पर रोक लगाना दुखद है। हमने 240 फुट के पुतले के दहन की अनुमति मांगी थी, लेकिन नकार दिया गया।” समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि अयोध्या में कहीं भी इन पुतलों का दहन करने की अनुमति दी जाए।
सुरक्षा पहले: प्रशासन का तर्क
प्रशासन का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। नवरात्रि और दशहरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सीओ चतुर्वेदी ने कहा, “भीड़ प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह आवश्यक था। हम पारंपरिक रामलीला आयोजनों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।”
इस बीच, अयोध्या में अन्य स्थानों पर पारंपरिक रूप से छोटे-मोटे रावण दहन कार्यक्रम होंगे, लेकिन राम कथा पार्क का यह भव्य आयोजन दहन के बिना ही समाप्त होगा। 2 अक्टूबर को विजयदशमी पर रामलीला का मंचन तो होगा, लेकिन बिना रावण वध के क्लाइमैक्स के।
यह घटना अयोध्या के सांस्कृतिक उत्सवों पर सुरक्षा के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है, जहां धार्मिक महत्व के साथ-साथ जनसुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। आयोजक अब वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं, ताकि उत्सव की भव्यता बनी रहे।
