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करूर भगदड़: 7 घंटे की देरी से पहुंचे विजय, भूख-प्यास से बेहाल भीड़… 39 मौतों की त्रासदी, जानें कैसे मचा हाहाकार

करूर भगदड़: 7 घंटे की देरी से पहुंचे विजय, भूख-प्यास से बेहाल भीड़… 39 मौतों की त्रासदी, जानें कैसे मचा हाहाकार

तमिलनाडु के करूर जिले में अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की रैली एक भयानक त्रासदी में बदल गई। शनिवार को वेलुसामीपुरम मैदान में आयोजित तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की इस रैली में भगदड़ मचने से 39 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 10 बच्चे और 16 महिलाएं शामिल हैं। 95 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। विजय के शाम 7:40 बजे पहुंचने में 7 घंटे की देरी, अनियोजित भीड़, भोजन-पानी की कमी और बिजली गुल होने जैसी चूक ने इस हादसे को जन्म दिया। चश्मदीदों के अनुसार, तपती धूप में घंटों इंतजार करने वाली भीड़ बेहाल हो चुकी थी, और एक 9 साल की बच्ची के लापता होने की अफवाह ने आग में घी डाल दिया।

घटना की पूरी टाइमलाइन: सुबह से शाम तक का इंतजार बना मौत का कारण  

– सुबह 11 बजे: TVK की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद समर्थक मैदान में जुटने लगे। आयोजकों ने 10,000 लोगों का अनुमान लगाया था, लेकिन 27,000 से 50,000 तक की भीड़ उमड़ पड़ी।

– दोपहर 12 बजे: विजय का कार्यक्रम निर्धारित था, लेकिन वे नहीं पहुंचे। तपिश भरी धूप, भूख-प्यास और पानी-खाने का अभाव—लोग बेहोश होने लगे। चश्मदीद नंद कुमार ने बताया, “भीड़ को कंट्रोल करने का कोई इंतजाम नहीं था। लोग घंटों थक चुके थे।”

– शाम 7:40 बजे: विजय प्रचार बस से मंच पर पहुंचे। उत्साहित भीड़ आगे बढ़ी, लेकिन जगह की तंगी और धक्कम-धक्के से लोग गिरने लगे।

– भगदड़ का ट्रिगर: एक 9 साल की बच्ची के लापता होने की अफवाह फैली, जिसके चलते लोग एक ही दिशा में दौड़े। फिर अचानक बिजली गुल हो गई, जनरेटर बंद—अंधेरे में अफरा-तफरी मच गई। लोग झोपड़ियों में घुसे, छप्पर फाड़कर भागे। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, लेकिन हालात बेकाबू हो चुके थे।

– रात 9 बजे के आसपास: विजय ने भाषण बीच में रोक दिया और भीड़ को शांत करने की अपील की, लेकिन तब तक 38-39 मौतें हो चुकी थीं।

प्रभारी डीजीपी जी. वेंकटरमन ने कहा, “विजय की देरी से भीड़ बेकाबू हो गई। आयोजकों ने 10,000 का अनुमान बताया था, लेकिन 27,000 पहुंचे। सिक्योरिटी अपर्याप्त थी।”

चूकें जो बनी मौत का सबब: 3 बड़ी लापरवाहियां 

1. देरी और भीड़ प्रबंधन: 7 घंटे का इंतजार, कोई वैकल्पिक प्लान नहीं। अनुमान से 2-5 गुना ज्यादा लोग।

2. बेसिक सुविधाओं की कमी: पानी, खाना, मेडिकल हेल्प न के बराबर। गर्मी में डिहाइड्रेशन से कई बेहोश।

3. तकनीकी खराबी: बिजली-लाइटिंग फेल, अफवाहों का प्रसार। पुलिस की मौजूदगी थी, लेकिन कंट्रोल नहीं।

पीड़ितों की आपबीतियां: दिल दहला देने वाली कहानियां  

– एक मां ने रोते हुए कहा, “भाई के बेटे की मौत हो गई, मेरे बच्चे की…”—वह लाशों के ढेर में अपनों को ढूंढ रही थी।

– एक और चश्मदीद ने बताया, “लोग झोपड़ी में घुसे, फिर छप्पर फाड़कर भागे। चीखें गूंज रही थीं।” वीडियो में साफ दिखा कि कैसे लोग दबकर मर रहे थे।

अस्पतालों में चीख-पुकार मची है—58 घायल भर्ती, कई की हालत नाजुक।

प्रतिक्रियाएं: विजय से लेकर पीएम तक का शोक  

– विजय: “मेरा दिल टूट गया है, मैं असहनीय पीड़ा में हूं। मृतकों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये दूंगा।” उन्होंने आपात बैठक बुलाई।

– सीएम एमके स्टालिन: 10 लाख रुपये मुआवजा, जांच आयोग गठित (अध्यक्ष: रिटायर्ड जज अरुणा जगदीशन)। खुद दौरा करेंगे।

– पीएम मोदी: शोक व्यक्त, केंद्रीय सहायता का ऐलान।

– रजनीकांत और अन्य: पूरे सिने-राजनीतिक हल में सन्नाटा। MHA ने रिपोर्ट मांगी।

यह हादसा राजनीतिक रैलियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए सख्त नियम जरूरी हैं? आपकी राय कमेंट्स में शेयर करें।  

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