RBI का बड़ा फैसला, मृतक के परिजनों को 15 लाख तक का क्लेम अब आसानी से मिलेगा; बैंकों को दिया गया निर्देश
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने मृतक खाताधारकों के परिजनों के लिए एक बड़ा राहत पैकेज ला दिया है। अब बिना जटिल दस्तावेजों के मृतक के बैंक खाते से 15 लाख रुपये तक की राशि निकाली जा सकेगी। यह फैसला मृतक खातों के दावों के निपटारे को सरल और तेज बनाने के लिए लिया गया है, ताकि परिजन लंबी कानूनी प्रक्रिया से बच सकें। RBI ने 26 सितंबर को जारी दिशानिर्देशों में बैंकों को 15 दिनों के अंदर सभी जरूरी दस्तावेज मिलने पर दावे निपटाने का आदेश दिया है। देरी होने पर बैंकों को परिजनों को मुआवजा देना होगा।
नए नियमों का पूरा ब्योरा: सरलीकृत प्रक्रिया से 15 लाख तक आसान निकासी
RBI ने मृतक खाताधारकों के दावों के निपटारे के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
– नॉमिनी या सर्वाइवर क्लॉज वाले खाते: अगर खाते में नॉमिनी है या सर्वाइवर क्लॉज है, तो मृतक की मौत के बाद बैलेंस राशि को नॉमिनी या सर्वाइवर को तुरंत ट्रांसफर किया जा सकता है। बैंक की जिम्मेदारी पूरी मानी जाएगी।
– बिना नॉमिनी के खाते: अगर नॉमिनी नहीं है, तो परिजनों को सरलीकृत प्रक्रिया अपनानी होगी। थ्रेशोल्ड लिमिट (15 लाख रुपये तक) के दावों के लिए न्यूनतम दस्तावेजों की जरूरत होगी। सहकारी बैंकों के लिए यह लिमिट 5 लाख रुपये है, लेकिन अन्य बैंकों के लिए 15 लाख या इससे ज्यादा (बैंक द्वारा तय)।
– दस्तावेजों में छूट: परिजनों को केवल मृत्यु प्रमाण-पत्र, पहचान प्रमाण और इंडेम्निटी बॉन्ड (सुरेटी के साथ, 1 लाख तक के दावों के लिए) जैसे बुनियादी दस्तावेज देने होंगे। जटिल लीगल हेयर सर्टिफिकेट या कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
– समय सीमा: सभी दस्तावेज मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के अंदर दावा निपटाना अनिवार्य। देरी पर बैंकों को प्रतिदिन 0.5% ब्याज के साथ मुआवजा देना होगा।
– सुरक्षित जमा लॉकर और कस्टडी आर्टिकल्स: मृतक के लॉकर या कस्टडी आर्टिकल्स के दावों के लिए भी समान प्रक्रिया, जिसमें 15 दिनों की समय सीमा शामिल है।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, “यह कदम परिजनों की कठिनाइयों को कम करेगा और बैंकिंग सेवाओं को और पारदर्शी बनाएगा।” यह दिशानिर्देश सभी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों, कोऑपरेटिव बैंकों और पेमेंट बैंकों पर लागू होंगे।
पृष्ठभूमि: पुरानी प्रक्रिया में लंबी देरी, अब बदलाव
पहले मृतक खातों के दावे निपटाने में महीनों लग जाते थे, क्योंकि लीगल हेयर सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट या कोर्ट के आदेश की जरूरत पड़ती थी। RBI ने 2004-05 में पहली बार सरलीकृत प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन अब इसे और मजबूत किया गया है। कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान भी RBI ने वैकल्पिक दस्तावेजों की अनुमति दी थी, जो अब स्थायी हो गई है।
बैंकों को जल्द लागू करने के निर्देश
बैंकों को इन दिशानिर्देशों को तुरंत लागू करना होगा और ग्राहकों को जागरूक करने के लिए नोटिस जारी करने होंगे। अगर दावा 15 लाख से ज्यादा है, तो सामान्य प्रक्रिया (कोर्ट ऑर्डर आदि) लागू रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सालाना लाखों दावे तेजी से निपटेंगे। क्या यह नियम सभी बैंकों में एकसमान लागू होगा? RBI की वेबसाइट पर पूरी गाइडलाइंस उपलब्ध हैं। अपडेट्स के लिए बने रहें।
(रिपोर्ट: unnatbharatlive.com न्यूज डेस्क | स्रोत: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स)
