भोपाल में गरबा पंडालों पर ‘भोपाली फॉर्मूला’: गोमूत्र छिड़काव और गंगाजल आचमन से गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने की नई रणनीति
भोपाल में गरबा पंडालों पर ‘भोपाली फॉर्मूला’: गोमूत्र छिड़काव और गंगाजल आचमन से गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने की नई रणनीति
नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकने के लिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अनोखा ‘भोपाली फॉर्मूला’ अपनाया जा रहा है। आयोजकों द्वारा प्रवेश द्वार पर आधार कार्ड चेक, तिलक लगाना, ‘जय श्री राम’ का जयकारा लगवाना, आम के पत्तों से गंगाजल का आचमन कराना और तांबे के लोटे से गोमूत्र का छिड़काव अनिवार्य कर दिया गया है। आयोजकों का दावा है कि इससे धार्मिक शुद्धता बनी रहेगी और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, खासकर ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं से बचाव होगा।
‘भोपाली फॉर्मूला’ की प्रक्रिया: प्रवेश के पांच कदम
भोपाल के अवधपुरी क्षेत्र में श्री कृष्ण सेवा समिति गरबा मंडल ने इस फॉर्मूले को लागू किया है। यहां प्रवेश की प्रक्रिया इस प्रकार है:
1. आधार कार्ड जांच: पहचान सत्यापन के लिए आईडी प्रूफ अनिवार्य।
2. तिलक और जयकारा: माथे पर तिलक लगाकर ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाना।
3. गंगाजल आचमन: आम के पत्तों से गंगाजल पिलाना।
4. गोमूत्र छिड़काव: तांबे के लोटे से गोमूत्र का छिड़काव।
5. प्रवेश: इन कदमों के बाद ही पंडाल में दाखिल की अनुमति।
आयोजक गोपाल ठाकुर ने कहा, “गैर-हिंदू इन पवित्र रस्मों को स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे उनकी पहचान हो जाएगी। यह बहनों-बेटियों की सुरक्षा के लिए है।” समिति का मानना है कि गोमूत्र और गंगाजल हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं, जो शुद्धिकरण का काम करते हैं।
पृष्ठभूमि: धीरेंद्र शास्त्री की सलाह से प्रेरणा
यह फॉर्मूला बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हालिया सलाह से प्रेरित है। 22 सितंबर को छतरपुर में उन्होंने गरबा आयोजकों से अपील की कि पंडाल के गेट पर गोमूत्र रखें और प्रवेश करने वालों पर छिड़काव करें। शास्त्री ने कहा, “जैसे हिंदू हज पर नहीं जाते, वैसे ही गैर-हिंदू गरबा में न आएं। इससे लव जिहाद रुकेगा।” विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी गरबा को ‘पवित्र आराधना’ बताते हुए केवल हिंदुओं के लिए प्रवेश की एडवाइजरी जारी की, जिसमें आधार कार्ड, तिलक और गोमूत्र छिड़काव शामिल हैं।
भोपाल जिला प्रशासन ने भी गरबा गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें आईडी प्रूफ, CCTV कैमरे और सुरक्षा फोर्स अनिवार्य हैं। हिंदू संगठनों ने पंडालों पर होर्डिंग लगाए हैं, जैसे “जिहादियों का आना सख्त मना, पकड़े गए तो घर वापसी कराई जाएगी।”
प्रतिक्रियाएं: सराहना से लेकर विवाद तक
– समर्थन: कई आयोजक और भक्तों ने इसे सराहा। एक महिला ने कहा, “गंगाजल-गोमूत्र पवित्र हैं, इससे सुरक्षित माहौल बनेगा।” VHP के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने इसे “धार्मिक शुद्धता” का कदम बताया।
– विरोध: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने VHP की एडवाइजरी की आलोचना की, कहा “यह हिंसा को बढ़ावा देगा। गरबा सबका उत्सव है।” कांग्रेस ने इसे “सांप्रदायिक विभाजन” करार दिया। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है, जहां कुछ इसे “अनुचित” बता रहे हैं।
– पिछले उदाहरण: 2016 में गुजरात के गांधीनगर में बजरंग दल ने इसी तरह गोमूत्र छिड़काव का अभियान चलाया था, जिसका स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ।
यह विवाद नवरात्रि के बीच आया है, जब देशभर में गरबा की धूम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सांस्कृतिक उत्सव को धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर ले जा सकता है। स्थिति पर नजर रखें, क्योंकि पुलिस अलर्ट पर है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत चेक करें।
