केदारनाथ सोना विवाद: गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आई सामने, हुए बड़े खुलासे—228 किलो सोने का दावा झूठा, केवल 23 किलो का इस्तेमाल
केदारनाथ सोना विवाद: गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आई सामने, हुए बड़े खुलासे—228 किलो सोने का दावा झूठा, केवल 23 किलो का इस्तेमाल
केदारनाथ धाम के सोने के विवाद पर गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट ने आखिरकार पर्दा उठा दिया है। एक साल से ज्यादा चली इस जांच में कोई अनियमितता या घोटाला साबित नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, दानकर्ता ने 228 किलो सोने के दावे को ही गलत बताया, और स्पष्ट किया कि केवल 23 किलो सोने का ही उपयोग गर्भगृह की सजावट में किया गया। यह खुलासा बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को भेजी गई रिपोर्ट में सामने आया, जिसकी अगुवाई गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने की थी।
विवाद की शुरुआत जून 2023 में हुई थी, जब चरधाम महापंचायत के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि गर्भगृह की दीवारों पर सोने की जगह पीतल चढ़ाया गया है, जिससे 1250 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसके बाद ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 228 किलो सोने के गायब होने का दावा किया। विपक्षी कांग्रेस ने इसे ‘सोना घोटाला’ बताते हुए सरकार पर हमला बोला। संस्कृति सचिव हरिचंद्र सेमवाल के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने तकनीकी विशेषज्ञों और सुनारों के साथ जांच की। रिपोर्ट में पाया गया कि दानकर्ता ने ही 228 किलो का आंकड़ा गलत बताया, और वास्तव में 23 किलो सोना व 1000 किलो तांबे की प्लेटिंग का इस्तेमाल हुआ।
कमिश्नर पांडे ने कहा, “जांच का दायरा अनियमितताओं पर था, न कि आंकड़े के स्रोत पर। लेकिन रिपोर्ट में कोई विवाद नहीं है।” BKTC अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कांग्रेस पर ‘झूठी अफवाहें’ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए कांग्रेस प्रोपेगैंडा कर रही है। 23 किलो सोना दानकर्ता ने ही चढ़ाया, और दस्तावेज पूरे हैं।” अजय ने स्पष्ट किया कि मंदिर समिति का सोने की खरीद में कोई हाथ नहीं था; दानकर्ता ने बिल और दस्तावेज जमा किए।
यह रिपोर्ट राज्य सरकार के लिए राहत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता हमारी प्राथमिकता है। जांच से सच्चाई सामने आई।” विपक्ष ने असंतोष जताया। कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने कहा, “रिपोर्ट को जल्दबाजी में बंद किया गया। SIT जांच जरूरी है।” शंकराचार्य ने भी कमिश्नर की जांच को ‘अधूरी’ बताया। नोवेंबर 2023 में मंदिर समिति ने खुद SIT जांच की मांग की थी, लेकिन अब रिपोर्ट से मामला शांत होता दिख रहा है।
यह विवाद केदारनाथ की पवित्रता पर सवाल खड़ा कर चुका था। दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अब राहत मिली है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में दान प्रक्रिया में और पारदर्शिता लानी होगी। क्या यह रिपोर्ट विवाद को पूरी तरह दफन कर देगी? समय बताएगा।
