EVM को संभालकर रखें: DUSU चुनाव पर दिल्ली हाईकोर्ट का यूनिवर्सिटी को सख्त निर्देश, NSUI ने लगाए छेड़छाड़ के आरोप
EVM को संभालकर रखें: DUSU चुनाव पर दिल्ली हाईकोर्ट का यूनिवर्सिटी को सख्त निर्देश, NSUI ने लगाए छेड़छाड़ के आरोप
नई दिल्ली, 22 सितंबर 2025: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के हालिया चुनाव में ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को कड़ा निर्देश दिया है। जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की अदालत ने सोमवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को आदेश दिया कि चुनाव में इस्तेमाल हुई सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम), पेपर ट्रेल और संबंधित दस्तावेजों को ताले-चाबी में सुरक्षित रखा जाए। याचिका में राष्ट्रपति पद की वोटिंग प्रक्रिया को रद्द करने और नई चुनाव कराने की मांग की गई है। मामला 16 दिसंबर को फिर आएगा।
यह याचिका कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री और इस साल राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार जोस्लिन नंदिता चौधरी ने दाखिल की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 सितंबर को हुए मतदान के दौरान ईवीएम में हेराफेरी हुई, जिसमें एबीवीपी उम्मीदवार आर्यन मान के नाम के सामने नीली स्याही के निशान लगाए गए थे। ये निशान वोटरों को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर किए गए थे, जिससे मतदान की गोपनीयता और निष्पक्षता भंग हुई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हंसराज कॉलेज, किरोड़ी मल कॉलेज और लॉ फैकल्टी में यह गड़बड़ी स्पष्ट रूप से देखी गई। उन्होंने चुनाव अधिकारियों, यूनिवर्सिटी स्टाफ और ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया।
खत्री ने कहा, “ईवीएम में हेराफेरी से छात्र लोकतंत्र पर हमला हुआ है। हम फ्री एंड फेयर इलेक्शन की मांग करते हैं।” चुनाव के नतीजे 19 सितंबर को आए थे, जिसमें एबीवीपी के आर्यन मान ने राष्ट्रपति पद जीता। यूनिवर्सिटी की ओर से वकील मोहिंदर रूपल ने इनकार किया, “यह सिर्फ अंगूठे का निशान है, कोई छेड़छाड़ नहीं।” अदालत ने नोट किया कि याचिका में जीतने वाले उम्मीदवार को पार्टी नहीं बनाया गया है।
DUSU चुनाव हमेशा से विवादों में रहा है। NSUI ने रिजल्ट से पहले ही मीडिया को ईवीएम गड़बड़ी की जानकारी दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला छात्र राजनीति में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। यूनिवर्सिटी ने जवाब दाखिल करने का समय मांगा है। छात्र संगठनों में तनाव बढ़ गया है, और NSUI ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। यह घटना दिल्ली यूनिवर्सिटी के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
