पाक का कबूलनामा: सीजफायर के लिए भारत कभी तीसरे पक्ष के दखल पर राजी नहीं हुआ
पाक का कबूलनामा: सीजफायर के लिए भारत कभी तीसरे पक्ष के दखल पर राजी नहीं हुआ
नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिनों के तनावपूर्ण संघर्ष के बाद लगे सीजफायर पर पाकिस्तान ने अब खुलासा किया है कि भारत ने कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने एक साक्षात्कार में कबूल किया कि सीजफायर द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव हुआ, न कि अमेरिका या किसी अन्य देश के हस्तक्षेप से। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को झुठला रहा है, जिन्होंने खुद को सीजफायर का सूत्रधार बताया था। ट्रंप ने मई में ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा था कि अमेरिका की मध्यस्थता से दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने पूर्ण और तत्काल सीजफायर पर सहमति जताई। लेकिन भारत ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जून में ट्रंप को फोन पर स्पष्ट शब्दों में बता दिया था कि “भारत ने कभी मध्यस्थता की मांग नहीं की और कभी नहीं करेगा।” मिस्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से कहा कि सीजफायर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ, जिसमें कोई ट्रेड डील या मध्यस्थता का मुद्दा नहीं उठा। पाकिस्तान ने भी अब इसे स्वीकार किया है। डार ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा, “हमने स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की। वाशिंगटन की कोई मध्यस्थता नहीं थी।” यह कबूलनामा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने ट्रंप को धन्यवाद दिया था, लेकिन अब साफ कर दिया कि यह द्विपक्षीय था।
यह विवाद कश्मीर मुद्दे पर भारत की कठोर नीति को रेखांकित करता है। भारत हमेशा शिमला समझौते का हवाला देकर तीसरे पक्ष के दखल को अस्वीकार करता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारत की कूटनीतिक मजबूती दिखाती है, जहां दिल्ली ने बिना किसी बाहरी मदद के संकट टाला। हालांकि, ट्रंप के दावों ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया था। पाकिस्तान ने पहले 2021 में यूएई की भूमिका स्वीकार की थी, लेकिन भारत ने टिप्पणी नहीं की। अब यह कबूलनामा सीजफायर की स्थिरता के लिए सकारात्मक हो सकता है। कुल मिलाकर, भारत की द्विपक्षीय नीति पर पाक का यह बयान एक राहत है।
