देहरादून में बादल फटने से मचा कोहराम, शहर में छाई तबाही की तूफानी छाया
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार रात (15 सितंबर 2025) से मंगलवार सुबह तक हुए बादल फटने ने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। सहस्त्रधारा, मालदेवता, टपकेश्वर महादेव मंदिर, फन वैली, सांतला देवी और डालनवाला जैसे क्षेत्रों में भयानक बाढ़ और भूस्खलन ने कहर बरपाया। चार लोग मारे गए, दो लापता हैं और पांच से अधिक लोग तेज बहाव में बह गए। नदियां उफान पर हैं, सड़कें धंस गईं, पुल बह गए और सैकड़ों घर-दुकानें मलबे में दब गईं। भारत मौसम विभाग (IMD) ने देहरादून, टिहरी गढ़वाल, चंपावत, बागेश्वर और नैनीताल में रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें भारी से अत्यधिक भारी बारिश, बिजली चमकने और 87 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं की चेतावनी दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी फोन पर स्थिति की समीक्षा की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। यह आपदा उत्तराखंड में मानसून की तीसरी बड़ी घटना है, जो जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को उजागर करती है।
बादल फटने की घटना की शुरुआत रात करीब 10 बजे हुई, जब सहस्त्रधारा क्षेत्र में दो बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं। सहस्त्रधारा में 192 मिमी, मालदेवता में 141.5 मिमी, हाथी बरकाला और जॉली ग्रांट में 92.5-92.5 मिमी तथा कालसी में 83.5 मिमी बारिश हुई। तमसा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया, जिससे टपकेश्वर महादेव मंदिर का पूरा परिसर जलमग्न हो गया। मंदिर के पुजारी आचार्य बिपिन जोशी ने बताया, “सुबह 5 बजे से नदी तेज बहने लगी। हनुमान मूर्ति तक पानी भर गया और मलबे से मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा। ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी।” मंदिर में भक्तों का आना-जाना बंद हो गया, और आसपास के घरों में पानी घुस गया। सहस्त्रधारा के मुख्य बाजार में मलबा बहकर आ गया, जिससे होटल, दुकानें और रेस्तरां तबाह हो गए। टपोवन इलाके में कई घर डूब गए, जबकि आईटी पार्क क्षेत्र में कारें बह गईं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “कल सुबह से बारिश हो रही थी, लेकिन रात 10 बजे बादल फटने से सब कुछ बदल गया। सड़कें बह गईं, और 4-5 लोग मलबे में दबे होने की खबर है।”
मालदेवता क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर थी। यहां 100 मीटर लंबी सड़क पूरी तरह बह गई, जिससे इलाके का संपर्क कट गया। एप्रोच ब्रिज ध्वस्त हो गया, और देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास पुल क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया, और देहरादून-मसूरी मार्ग प्रभावित रहा। सांतला देवी और डालनवाला में भूस्खलन से घरों को नुकसान पहुंचा। कुल मिलाकर, 1,388 पशुशालाएं, 74 मजदूर शेड, रसोईघर, बाथरूम और 33 दुकानें नष्ट हो गईं। आईटी पार्क में व्यावसायिक भवन डूब गए, और प्रेमनगर जैसे इलाकों में जलभराव हो गया। देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर एक ब्रिज क्षतिग्रस्त होने से वाहनों का आवागमन बाधित हो गया। रिसी के ग्रामीण इलाकों में चंद्रभागा नदी उफान पर आ गई, जिससे हाईवे पर पानी पहुंच गया और रेल सेवाएं निलंबित हो गईं। एसडीआरएफ ने तीन लोगों को बचाया, लेकिन संचार व्यवस्था चरमरा गई।
इस आपदा में मानवीय क्षति भी भयावह रही। चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो लापता हैं। पांच से अधिक लोग नदी के तेज बहाव में बह गए, जिनकी तलाश जारी है। विपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने पुष्टि की कि बादल फटने से घर, ब्रिज और दुकानें नष्ट हो गईं। 584 से अधिक लोग फंस गए, जिनमें से ज्यादातर को बचाया जा चुका है। पौंधा स्थित देवभूमि इंस्टीट्यूट में 200 छात्र-छात्राएं जलभराव में फंस गईं, लेकिन एसडीआरएफ ने त्वरित रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। एनडीआरएफ ने टोंस नदी में एक व्यक्ति को बिजली के खंभे से बचाया। मुख्यमंत्री धामी ने मालदेवता, केसरवाला और सहस्त्रधारा का दौरा किया। उन्होंने कहा, “रात भर की बारिश से नदियां उफान पर हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन राहत में जुटे हैं। 25-30 जगहों पर सड़कें बह गईं, घर क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन हम स्थिति पर काबू पा लेंगे।” पीएम मोदी ने 1,200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की, जबकि गृह मंत्री शाह ने सात रेस्क्यू टीमों की मदद का वादा किया।
राहत और बचाव कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहे हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीडब्ल्यूडी और आर्मी की इबेक्स ब्रिगेड तैनात हैं। बुलडोजर से मलबा हटाया जा रहा है, और प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जिला मजिस्ट्रेट ने कक्षा 1 से 12 तक सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने का आदेश दिया। राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां भोजन, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध हैं। टोंस, सोंग और तमसा नदियों के किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। विपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट पर है, और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। हालांकि, मलबे के बहाव से सर्च ऑपरेशन रुक गया है, लेकिन अधिकारी निरंतर निगरानी कर रहे हैं।
यह आपदा उत्तराखंड में मानसून की तीसरी बड़ी घटना है। अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं से 85 लोग मारे गए, 128 घायल हुए और 94 लापता हैं। अगस्त में उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल, चमोली के थराली, रुद्रप्रयाग के चेनागढ़, पौड़ी के सैंजी, बागेश्वर के कपकोट और नैनीताल के हिस्सों में भी बादल फटने और भूस्खलन से भारी तबाही हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्लेशियर पिघलने, अत्यधिक वर्षा और मानवीय गतिविधियों जैसे अतिक्रमण और वनों की कटाई ने स्थिति को और खराब किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में GLOF (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड) या भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। IMD की चेतावनी के बावजूद, स्थानीय प्रशासन को ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने और चेतावनी प्रणाली सुधारने की जरूरत है।
सरकार ने राहत के लिए कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा, और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। 9 सितंबर को पीएम मोदी ने देहरादून का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की थी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि भविष्य में जल संरक्षण, वनरोपण और अवैध निर्माण पर रोक लगानी चाहिए। यह तबाही न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड को हिला रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार ऐसी घटनाएं उनकी जिंदगी को नर्क बना रही हैं। प्रशासन की तत्परता से जानमाल के नुकसान को कम किया जा सका, लेकिन लंबे समय के समाधान की मांग तेज हो गई है। देहरादून में छावनी जैसा माहौल है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सामान्यcy बहाल हो जाएगी। यह घटना पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देती है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराए।
