सोलर इक्लिप्स: 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को, हिंदू मान्यताओं में इन चीजों का करें दान
सोलर इक्लिप्स: 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को, हिंदू मान्यताओं में इन चीजों का करें दान
नई दिल्ली, 15 सितंबर 2025: खगोल विज्ञान की दुनिया में एक और रोमांचक घटना होने वाली है। 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को होने वाला है, जो एक आंशिक (पार्शियल) ग्रहण होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगा, जिसमें न्यूजीलैंड, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में दिखेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना माना जाता है। इस दौरान दान-पुण्य का विशेष महत्व है, जो नकारात्मक प्रभावों को कम करने और पुण्य प्राप्ति में सहायक माना जाता है।
नासा और टाइम एंड डेट जैसी संस्थाओं के अनुसार, यह ग्रहण 21 सितंबर को दोपहर 12:29 बजे IST से शुरू होगा और लगभग 4 घंटे तक चलेगा। अधिकतम समय पर चंद्रमा सूर्य के 85% हिस्से को ढक लेगा। 2025 में कुल दो सूर्य ग्रहण हो रहे हैं—पहला 29 मार्च को पार्शियल था, जो उत्तरी गोलार्ध में दिखा। यह दूसरा और आखिरी ग्रहण दक्षिणी क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ग्रहण चंद्रमा और सूर्य की कक्षीय स्थिति के कारण हो रहा है, जो पृथ्वी पर सूर्य की छाया डालता है। हालांकि, भारत में न दिखने के बावजूद, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल (12 घंटे पहले से) का पालन किया जा सकता है।
हिंदू ज्योतिष और शास्त्रों में सूर्य ग्रहण को राहु के प्रभाव से जोड़ा जाता है, जो सूर्य को निगलने का प्रयास करता है। इस दौरान दान करने से ग्रह दोष कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। पंडितों के अनुसार, ग्रहण काल में दान का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक होता है। विशेषज्ञों ने सूर्य से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की सलाह दी है:
– गेहूं और गुड़: सूर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका दान सम्मान, करियर वृद्धि और व्यापार सफलता के लिए शुभ माना जाता है।
– तांबे के बर्तन या सिक्के: सूर्य से जुड़े होने से स्वास्थ्य मजबूत होता है और सूर्य दोष कम होते हैं।
– अनाज, चावल, दालें: चावल चंद्रमा और शुक्र के लिए, चना दाल गुरु के लिए, मूंग दाल बुध के लिए, उड़द दाल शनि-राहु के लिए, चना मंगल के लिए। ये दान ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करते हैं।
– कपड़े, धन और अनाज: ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर ये दान करें। इससे धन-धान्य में वृद्धि और समृद्धि आती है।
स्कंद पुराण और पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में कहा गया है कि ग्रहण के दौरान जल या दान से पितरों को तृप्ति मिलती है। हालांकि, ग्रहण के दौरान भोजन, नींद या मंदिर स्पर्श निषिद्ध है। ज्योतिषी पंडित शर्मा ने बताया, “यह दान न केवल धार्मिक लाभ देता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। भारत में लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए ग्रहण देखें और दान करें।” वैज्ञानिक दृष्टि से, ग्रहण orbital मैकेनिक्स का प्रदर्शन है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से यह आस्था का प्रतीक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ग्रहण जलवायु परिवर्तन और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत में ग्रहण न दिखने से कोई खतरा नहीं, लेकिन धार्मिक नियमों का पालन वैकल्पिक है। अगला सूर्य ग्रहण 2026 में होगा। दान के लिए स्थानीय मंदिर या जरूरतमंदों को चुनें, ताकि इसका वास्तविक लाभ हो।
