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उत्तराखंड आपदा 2025: केंद्र की आठ सदस्यीय टीम नुकसान का आकलन करने पहुंची

उत्तराखंड आपदा 2025: केंद्र की आठ सदस्यीय टीम नुकसान का आकलन करने पहुंची

उत्तराखंड में मानसून ने इस साल भारी तबाही मचाई है। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से कई जिलों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस आपदा की गंभीरता का जायजा लेने और नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की एक आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम सोमवार को देहरादून पहुंची। उत्तराखंड सरकार ने केंद्र से 5,702.15 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य तेज किए जा सकें।

केंद्रीय टीम का दौरा और बैठक

केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में यह टीम देहरादून के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में पहुंची। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया, “टीम को विशेष बैठक में मानसून सीजन में हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा दिया गया। इसके बाद टीम छह प्रभावित जिलों—उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पौड़ी, और नैनीताल—का दौरा करेगी।”

टीम दो समूहों में बंटकर कार्य करेगी। पहले चरण में उत्तरकाशी और चमोली का दौरा होगा, जबकि दूसरे चरण में रुद्रप्रयाग और बागेश्वर का निरीक्षण किया जाएगा। पौड़ी और नैनीताल के दौरे भी शेड्यूल में शामिल हैं। सभी जिलों के जिलाधिकारी टीम के साथ मौजूद रहेंगे और जमीनी स्थिति की जानकारी देंगे।

आपदा की गंभीरता और नुकसान

उत्तराखंड में इस साल 574 मिमी बारिश ने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। अगस्त में सामान्य से दोगुनी बारिश (300-350 मिमी के मुकाबले 574 मिमी) ने भारी तबाही मचाई। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक:

– 79 लोगों की मौत, 115 घायल, और 90 लोग लापता।

– 238 पक्के और 2 कच्चे मकान पूरी तरह नष्ट, 2,835 पक्के और 402 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त।

– 3,953 छोटे-बड़े पशुओं की मौत।

– आर्थिक नुकसान: लोक निर्माण विभाग को 1,164 करोड़, सिंचाई विभाग को 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 4.57 करोड़, और शिक्षा विभाग को 68.28 करोड़ का नुकसान। कुल अनुमानित नुकसान 5,702.15 करोड़ रुपये।

उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को बादल फटने से कई होटल, रिजॉर्ट और होम स्टे मलबे में तब्दील हो गए, और 60 से अधिक लोग मलबे में दब गए। चमोली, पौड़ी, और रुद्रप्रयाग में सड़कें, पुल और खेती की जमीनें बर्बाद हुईं।

राहत और मुआवजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी की और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। धामी ने कहा, “जिनके घर पूरी तरह नष्ट हुए हैं, उन्हें SDRF मानकों के अलावा अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।” राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत, मुआवजा, और सुरक्षित विस्थापन की व्यवस्था शुरू कर दी है।

केंद्र की टीम दो दिनों तक प्रभावित इलाकों का हवाई और जमीनी सर्वेक्षण करेगी, स्थानीय लोगों से बातचीत करेगी, और जिला प्रशासन के प्रेजेंटेशन के आधार पर नुकसान का आकलन करेगी। इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर राहत राशि जारी होगी।

भविष्य की तैयारियां

आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने यात्रियों और निवासियों से बारिश के दौरान सावधानी बरतने की अपील की, क्योंकि सितंबर में भी भारी बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा, “भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना हुआ है। सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।” केंद्र की मदद से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पुनर्वास कार्यों को गति देने की योजना है।

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