राजनीति

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: BJD और BRS का चौंकाने वाला फैसला, 9 सितंबर को मतदान से रहेंगे दूर

उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: BJD और BRS का चौंकाने वाला फैसला, 9 सितंबर को मतदान से रहेंगे दूर

उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक दिन पहले, बीजू जनता दल (BJD) और भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने 9 सितंबर को होने वाले मतदान से दूरी बनाने का बड़ा ऐलान किया है। यह फैसला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच चल रहे कड़े मुकाबले को और रोचक बना सकता है। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा, और उसी दिन शाम 6 बजे से मतगणना शुरू होगी।

BJD और BRS का रुख

– बीजू जनता दल (BJD): BJD नेता सस्मित पात्रा ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने वरिष्ठ नेताओं और सांसदों से विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “BJD एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों से समान दूरी बनाए रखेगा। हमारा ध्यान ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों के विकास और कल्याण पर है।” BJD के पास राज्यसभा में 7 सांसद हैं, लेकिन लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

– भारत राष्ट्र समिति (BRS): BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव (KTR) ने तेलंगाना में यूरिया की कमी को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “यूरिया की कमी के कारण तेलंगाना के किसान गंभीर संकट में हैं। हमारी प्राथमिकता किसानों की पीड़ा को व्यक्त करना है, इसलिए हम मतदान से दूर रहेंगे।” KTR ने यह भी कहा कि अगर नोटा (None of the Above) का विकल्प होता, तो BRS इसका इस्तेमाल करती। BRS के पास राज्यसभा में 4 सांसद हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव का परिदृश्य

यह मध्यावधि चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद हो रहा है। एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है।

उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 781 मतदाता हैं, जिसमें लोकसभा (543) और राज्यसभा (233 निर्वाचित और 12 मनोनीत) के सांसद शामिल हैं। सात सीटें रिक्त होने के कारण एनडीए को अपने 425-436 वोटों और YSRCP के 11 वोटों के समर्थन से बढ़त है। इंडिया गठबंधन के पास लगभग 324 वोट हैं।

विपक्ष को झटका, NDA को फायदा?

BJD और BRS के इस फैसले से इंडिया गठबंधन को झटका लगा है, क्योंकि उनके 11 सांसदों (BJD के 7 और BRS के 4) की अनुपस्थिति विपक्षी उम्मीदवार की राह को और मुश्किल कर सकती है। हालांकि, अकाली दल, ZPM, VOTTP, और तीन निर्दलीय सांसदों ने अभी अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन की जीत लगभग तय है, लेकिन BJD और BRS की अनुपस्थिति से जीत का अंतर थोड़ा प्रभावित हो सकता है।

सियासी संदर्भ

BJD का यह रुख नया नहीं है; पार्टी ने 2012 में भी उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था, जबकि 2017 में विपक्ष और 2022 में NDA का समर्थन किया था। BRS का फैसला तेलंगाना में किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह दोनों दलों की तटस्थता और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *