नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 10 किमी निर्माण प्रतिबंध से जमीन की कीमतों और रियल एस्टेट पर असर, नए नियमों ने बदला जेवर का बाजार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 10 किमी निर्माण प्रतिबंध से जमीन की कीमतों और रियल एस्टेट पर असर, नए नियमों ने बदला जेवर का बाजार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), जो नवंबर 2025 में शुरू होने वाला है, ने यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट बाजार में उछाल ला दिया है। हालांकि, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) और गौतम बुद्ध नगर प्रशासन द्वारा हाल ही में लागू 10 किमी के दायरे में अनधिकृत निर्माण पर प्रतिबंध ने बाजार की गतिशीलता को बदल दिया है। इस नियम ने जमीन की कीमतों और रियल एस्टेट सेक्टर पर दीर्घकालिक और अल्पकालिक प्रभाव डाले हैं।
10 किमी निर्माण प्रतिबंध: क्या है नया नियम?
जुलाई 2025 में, NIAL और जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के 10 किमी दायरे में बिना एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के सभी निर्माण कार्यों, पेड़ लगाने और ड्रोन गतिविधियों पर रोक लगा दी। 10-20 किमी के दायरे में ऊंचाई मंजूरी अनिवार्य है। यह नियम विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है, जो अवैध निर्माणों को लक्षित करता है। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) से मंजूर और NOC प्राप्त परियोजनाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी।
जमीन की कीमतों पर प्रभाव
– अल्पकालिक प्रभाव: प्रतिबंध के बाद अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और डिमॉलिशन के डर से खरीदारों में सतर्कता बढ़ी है। जेवर, ग्रेटर नोएडा, और यमुना एक्सप्रेसवे (सेक्टर 17, 18, 20, 22D) में जमीन की कीमतों में अस्थायी ठहराव देखा गया। कुछ क्षेत्रों में कीमतों में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक केवल RERA-पंजीकृत और NOC-अनुमोदित परियोजनाओं पर ध्यान दे रहे हैं।
– दीर्घकालिक प्रभाव: विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध दीर्घकाल में कीमतों को बढ़ाएगा। YEIDA-अनुमोदित परियोजनाओं की मांग बढ़ रही है, और 2022-2025 के बीच जेवर के पास जमीन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं। कोलियर्स इंडिया के अनुसार, 2024 में औसत कीमत 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी, जो 2030 तक 10,500 रुपये तक पहुंच सकती है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर असर
1. निवेशकों के लिए अवसर: एयरपोर्ट के आसपास फिल्म सिटी, सेमीकंडक्टर हब, और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स से औद्योगिक और आवासीय मांग बढ़ रही है। YEIDA ने भूमि आवंटन दरों में 30-40% की वृद्धि की है, जिससे आधारभूत कीमतें बढ़ी हैं।
2. कानूनी परियोजनाओं को बढ़ावा: केवल NOC और YEIDA-अनुमोदित परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं, जिससे बाजार में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ रही है। 2025 की पहली छमाही में NCR की 23% आवासीय बिक्री इन क्षेत्रों से हुई।
3. अवैध निर्माणों पर सख्ती: आबादी (गांव) जमीनों पर बिना मंजूरी के बने ढांचों को ध्वस्त करने या जुर्माने का जोखिम है, जिससे अनधिकृत डेवलपर्स बाहर हो रहे हैं।
4. कनेक्टिविटी से उछाल: यमुना एक्सप्रेसवे का विस्तार, गाजियाबाद-जेवर RRTS (2027-2030 तक पूरा), और मेट्रो विस्तार से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ रही है, जो रियल एस्टेट को और आकर्षक बनाएगी।
चुनौतियां और सुझाव
नए नियमों ने छोटे डेवलपर्स और व्यक्तिगत खरीदारों के लिए चुनौतियां बढ़ाई हैं, क्योंकि NOC प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल RERA-पंजीकृत और AAI-अनुमोदित परियोजनाओं में निवेश करें। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का मानना है कि “जेवर में कीमतें पहले ही बहुत बढ़ चुकी हैं, अब सुधार की जरूरत है।”
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेवर को रियल एस्टेट हॉटस्पॉट बना दिया है, लेकिन 10 किमी निर्माण प्रतिबंध ने बाजार को अनुशासित कर दिया है। अल्पकाल में कीमतों में ठहराव संभव है, लेकिन दीर्घकाल में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास से जमीन की कीमतें और मांग बढ़ेगी। निवेशकों को सावधानी से सत्यापित परियोजनाओं में निवेश करना चाहिए।
