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पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत: यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर हुई चर्चा

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत: यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के हालिया प्रयासों पर विचार-विमर्श किया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक मंच पर यूक्रेन संकट को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति को सकारात्मक बताया। दोनों ने 2047 रोडमैप, इंडो-पैसिफिक रोडमैप और रक्षा औद्योगिक रोडमैप के तहत भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति बहाली के लिए भारत के समर्थन को दोहराया।

मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, “राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों, विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने के प्रयासों पर विचार साझा किए। भारत-फ्रांस साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता में अहम भूमिका निभाएगी।”

यह बातचीत पेरिस में गुरुवार को हुए एक शिखर सम्मेलन के दो दिन बाद हुई, जहां मैक्रों ने यूक्रेन में “रिअश्योरेंस फोर्स” तैनात करने की योजना की घोषणा की थी। इस सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी शामिल थे। मैक्रों ने फरवरी 2026 में भारत में होने वाले AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया, जिसके लिए पीएम मोदी ने उनका आभार जताया।

भारत ने यूक्रेन संकट में शांति के लिए लगातार कूटनीति और बातचीत पर जोर दिया है। हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर शांति की अपील की थी। यूरोपीय नेताओं के साथ भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी भारत की मध्यस्थता की भूमिका को सराहा था।

दोनों नेताओं ने वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया और भविष्य में भी संपर्क में रहने पर सहमति जताई।

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