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Trump का 50% टैरिफ आज से भारत पर लागू, जाने किन-किन सेक्टर पर पड़ेगा इसका असर 

Trump का 50% टैरिफ आज से भारत पर लागू, जाने किन-किन सेक्टर पर पड़ेगा इसका असर 

वाशिंगटन, 27 अगस्त 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ आज से प्रभावी हो गए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार में हलचल मच गई है। यह टैरिफ मुख्य रूप से भारत पर लगाया गया है, जो रूस से तेल खरीदने के कारण ‘सेकेंडरी टैरिफ’ के रूप में अतिरिक्त 25% की पेनल्टी है। इससे पहले अप्रैल 2025 में घोषित 25% रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ मिलाकर कुल 50% हो गया। व्हाइट हाउस ने इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ेगा और भारतीय निर्यात प्रभावित होगा। ट्रंप ने कहा, “यह टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और विदेशी व्यापार असंतुलन को ठीक करेंगे।” हालांकि, IMF और OECD ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक विकास दर 2025 में कम हो सकती है।

यह टैरिफ 6 अगस्त को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ्स का हिस्सा है, जो ट्रेड डेफिसिट को कम करने के लिए लगाए गए। भारत के मामले में, रूस से तेल आयात को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ बताते हुए पेनल्टी लगाई गई। यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने हार्मोनाइज्ड टैरिफ शेड्यूल (HTSUS) में बदलाव कर इसे लागू किया। अप्रैल से ट्रंप ने 10% बेसलाइन टैरिफ सभी देशों पर लगाया था, जो अब 15-50% तक बढ़ गया। भारत के अलावा, ब्राजील पर 50% टैरिफ (जिसमें 40% अतिरिक्त पेनल्टी) और अन्य देशों जैसे वियतनाम (20%) पर भी असर पड़ा। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इससे अमेरिकी ट्रेजरी में अरबों डॉलर आएंगे, लेकिन गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, 70% लागत उपभोक्ताओं को वहन करनी पड़ेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर निर्यात-आधारित सेक्टर्स पर दिखेगा। टेक्सटाइल और गारमेंट्स उद्योग, जो अमेरिका को 40% निर्यात भेजता है, सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। कपास, रेडीमेड गारमेंट्स और यार्न पर 50% टैरिफ से कीमतें 20-30% बढ़ सकती हैं, जिससे ऑर्डर कम होंगे। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अनुसार, यह सेक्टर 1.5 करोड़ नौकरियों को जोखिम में डाल सकता है। फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि अमेरिका भारत से जेनेरिक दवाओं का 40% आयात करता है। टैरिफ से दवा कंपनियों जैसे सन फार्मा और डॉ. रेड्डी की लागत बढ़ेगी, जो पहले से ही 200% टैरिफ की धमकी का सामना कर रही हैं। आईटी हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी असर पड़ेगा, जहां सेमीकंडक्टर्स और कंपोनेंट्स महंगे हो जाएंगे।

इसके अलावा, ऑटोमोबाइल और पार्ट्स सेक्टर प्रभावित होगा। भारत से अमेरिका को ऑटो कंपोनेंट्स का निर्यात $2 बिलियन से ज्यादा है, और 25% टैरिफ (जो 50% तक जा सकता है) से टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां प्रभावित होंगी। कृषि उत्पादों जैसे चावल, सेब और फल-सब्जियां भी महंगे होंगे, क्योंकि भारत के उच्च टैरिफ को रेसिप्रोकल माना गया। स्टील और एल्युमिनियम पर पहले से 50% टैरिफ है, जो भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए दोहरी मार है। अर्थशास्त्री ओलू सोनोला ने कहा, “भारतीय निर्यात में 10-15% गिरावट आ सकती है, जो GDP को 0.5% प्रभावित करेगा।” भारतीय सरकार ने जवाबी कार्रवाई पर विचार किया है, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “हम डब्ल्यूटीओ के जरिए चुनौती देंगे।”

अमेरिका में भी असर दिख रहा है। आयातित सामान की कीमतें बढ़ने से इन्फ्लेशन 2.7% तक पहुंच गया। एडिडास और नाइकी जैसी कंपनियों ने अमेरिकी ग्राहकों के लिए दाम बढ़ाए। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर अल्बर्टो कावallo ने कहा, “टैरिफ से उपभोक्ता कीमतें 5% ऊपर हैं, और यह धीरे-धीरे बढ़ेगा।” ट्रंप के आलोचक, जैसे जेनेट येलन, कहते हैं कि इससे अमेरिकी परिवारों पर $1,300 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यूरोपीय संघ ने 15% टैरिफ पर डील की, लेकिन भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हो रहा। ट्रंप ने कहा कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेड वॉर को बढ़ावा देगा। फिलहाल, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है, और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता तेज हो सकती है।

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