उत्तराखंड में मानसून का कहर: PWD को 554 करोड़ से अधिक का नुकसान, सतपाल महाराज ने दी जानकारी
उत्तराखंड में मानसून का कहर: PWD को 554 करोड़ से अधिक का नुकसान, सतपाल महाराज ने दी जानकारी
देहरादून: इस वर्ष उत्तराखंड में मानसून ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं से लोक निर्माण विभाग (PWD) को 554 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। यह जानकारी स्वयं लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने कहा कि राज्य के सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है, और विभाग आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दे रहा है। IMD की चेतावनी के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।
मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि मानसून सीजन की शुरुआत से अब तक 1,813 से अधिक भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में दोगुनी हैं। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे हिमालयी जिलों में सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के लिए, उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को हुए फ्लैश फ्लड ने कई सड़कों को ध्वस्त कर दिया, जबकि पौड़ी गढ़वाल में पाबो-झंगबो-गढ़ीगांव-पिनानी सड़क को मलबे ने अवरुद्ध कर दिया। महाराज ने कहा, “96 सड़कें, जिनमें 2 राष्ट्रीय राजमार्ग, 20 राज्य राजमार्ग और 58 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं, अभी भी बंद हैं। 514 मशीनें तैनात की गई हैं, और कार्य तेजी से चल रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मानसून के बाद पूर्ण पुनर्निर्माण का कार्य शुरू होगा।
इस आपदा में अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 130 से ज्यादा घायल हुए हैं। SEOC के आंकड़ों के अनुसार, उत्तरकाशी में सबसे ज्यादा 8 मौतें हुईं, जबकि मंडी जिले में 11 लोग मलबे में दब गए। धराली, भद्रवाह और कटरा जैसे क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन ने घरों, होटलों और पुलों को नष्ट कर दिया। वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर अर्धकुंवारी के पास भूस्खलन से 5 तीर्थयात्री मलबे में दब गए, और यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जिलों का दौरा किया और केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग की।
विपक्ष ने सरकार की आपदा प्रबंधन नीति पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा, “ट्रिपल इंजन का चमत्कार देखना है तो उत्तरकाशी पहुंचिए। सड़कें अवरुद्ध, JCB की कमी, BRO क्या कर रहा है?” उन्होंने धरासू और चिन्यालीसौड़ के बीच रोड पर पड़े विशाल बोल्डरों का जिक्र किया। कांग्रेस ने मांग की है कि नुकसान का आकलन पारदर्शी हो और प्रभावितों को तत्काल मुआवजा दिया जाए।
सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। NDRF, SDRF और सेना की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, और लोगों को नदियों-नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, और लंबी अवधि की योजना जरूरी है।
