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भारत का सुदर्शन चक्र: DRDO ने किया सफल टेस्ट, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के उड़ाए थे होश 

भारत का सुदर्शन चक्र: DRDO ने किया सफल टेस्ट, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के उड़ाए थे होश 

नई दिल्ली, 24 अगस्त 2025: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक बार फिर भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 23 अगस्त को ओडिशा तट पर एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस प्रणाली में स्वदेशी क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) शामिल है, जिसे DRDO ने पूरी तरह से आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर विकसित किया है। इस टेस्ट ने भारत के ‘सुदर्शन चक्र’ की ताकत को फिर से साबित किया, जिसने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की हवाई आक्रामकता को ध्वस्त कर दिया था।

DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने बताया कि IADWS एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें QRSAM के साथ-साथ अकाश और अकाश-एनजी मिसाइलें शामिल हैं। यह प्रणाली 600 किलोमीटर तक हवाई खतरों का पता लगाने और 400 किलोमीटर तक लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम है। 23 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे हुए टेस्ट में इस प्रणाली ने ड्रोन और मिसाइलों को पूरी तरह नष्ट कर अपनी प्रभावशीलता साबित की।

ऑपरेशन सिंदूर में इस प्रणाली ने पाकिस्तान के 300-400 ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम कर दिया था, जो 7-8 मई को 15 भारतीय शहरों और सैन्य ठिकानों पर लक्षित थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने तब कहा था, “पाकिस्तान ने तुर्की के Asisguard Songar ड्रोन्स और सशस्त्र यूएवी का इस्तेमाल किया, लेकिन सुदर्शन चक्र और अकाशतीर प्रणाली ने सभी हमलों को विफल कर दिया।” बठिंडा सैन्य स्टेशन पर एक यूएवी को भी पकड़ा और निष्क्रिय किया गया।

DRDO ने ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइलों और अकाशतीर प्रणाली के उपयोग को भी रेखांकित किया, जिसने लाहौर के पास पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को ध्वस्त किया। यह ऑपरेशन आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए शुरू किया गया था, जिसमें DRDO की स्वदेशी तकनीकों जैसे नगस्त्र-1 और स्वार्म ड्रोन्स ने अहम भूमिका निभाई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा, “यह टेस्ट आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। सुदर्शन चक्र ने न केवल पाकिस्तान की हवाई आक्रामकता को रोका, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की ताकत को प्रदर्शित किया।” DRDO का लक्ष्य अब इस प्रणाली को और उन्नत कर 2035 तक ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ के तहत पूर्ण स्वदेशी रक्षा ढाल तैयार करना है।

यह सफलता भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ाने की दिशा में भी एक कदम है, क्योंकि कई मित्र देशों ने इन हथियारों में रुचि दिखाई है।

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