दीपावली पंचांग विशेष: जानिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, योग, नक्षत्र और राहुकाल का समय
दीपावली पंचांग विशेष: जानिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, योग, नक्षत्र और राहुकाल का समय
नई दिल्ली:
हिंदू धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व माना जाता है, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, निवेश या यात्रा से पहले ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का आकलन किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की गति पर आधारित काल-गणना की एक प्राचीन पद्धति है। रविवार को दीपावली का पावन पर्व मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन के पंचांग से जुड़ी खास बातें और सभी प्रमुख मुहूर्त:
तिथि और सूर्योदय-सूर्यास्त
तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शनिवार को सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर अगले दिन रविवार को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी, जो 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त: रविवार को सुबह 6:40 बजे सूर्योदय और शाम 5:41 बजे सूर्यास्त होगा।
चंद्रोदय एवं चंद्रास्त: सुबह 5:34 बजे चंद्रोदय तथा शाम 4:54 बजे चंद्रास्त होगा।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विभिन्न समयों पर विशेष मुहूर्त तय किए गए हैं:
मुख्य लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक।
प्रदोष काल: शाम 5:41 बजे से रात 8:17 बजे तक।
निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:44 बजे से मध्य रात्रि 12:36 बजे तक।
कार्यालय (ऑफिस) पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:26 बजे से 2:54 बजे तक ऑफिस में पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा।
नक्षत्र, योग और गोचर
नक्षत्र: इस दिन सूर्य देव विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। इस नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं, जो व्यक्ति में प्रशासनिक, प्रबंधकीय और प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा जगाते हैं।
योग: रविवार तड़के 3:27 बजे से आयुष्मान योग रहेगा, जो सोमवार सुबह 3:02 बजे तक चलेगा, जिसके बाद सौभाग्य योग आरंभ होगा। इस योग में जन्मे जातक ऊर्जावान और अच्छे स्वास्थ्य वाले माने जाते हैं।
ग्रह गोचर: इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही तुला राशि में विराजमान रहेंगे। तुला राशि में सूर्य के होने को ज्योतिष में नीचस्थ माना जाता है, जबकि तुला का चंद्रमा जातक को कलाप्रेमी, मिलनसार और आकर्षक स्वभाव देता है।
विशेष शुभ मुहूर्त (अभिजीत एवं अमृतकाल)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक। यह दिन का सबसे शुभ समय होता है, जिसमें किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
अमृतकाल: रात 10:01 बजे से 11:43 बजे तक। यह अत्यंत सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि है, जो नए व्यापार, निवेश और पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।
अशुभ काल (राहुकाल, यमगंड और गुलिक)
राहुकाल: शाम 4:18 बजे से 5:41 बजे तक। इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
यमगंड काल: दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक। इस काल को नए व्यापार, यात्रा या पैसों के लेन-देन के लिए अशुभ माना गया है।
गुलिक काल: दोपहर 2:55 बजे से 4:18 बजे तक। इस काल में नए कार्य शुरू करने से बचा जाता है, हालांकि बैंक में पैसे जमा करना या दान-पुण्य करना इस समय उत्तम माना जाता है।
दिशाशूल: रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।

